Brahma
Verses · Meaning · Recitation · Details

Navgrah Ki Aarti

Also known as: Navgrah Aarti

Navgrah Aarti

daily aarti·smarta·bhakti
10 verses
VERSE 0

आरती श्री नवग्रहों की कीजै. बाध, कष्ट,रोग,हर लीजै ।

VERSE 1

सूर्य तेज़ व्यापे जीवन भर. जाकी कृपा कबहु नहिं छीजै। ॥ आरती श्री नवग्रहों की कीजै.. ॥

VERSE 2

रुप चंद्र शीतलता लायें. शांति स्नेह सरस रसु भीजै। ॥ आरती श्री नवग्रहों की कीजै.. ॥

VERSE 3

मंगल हरे अमंगल सारा. सौम्य सुधा रस अमृत पीजै । ॥ आरती श्री नवग्रहों की कीजै.. ॥

VERSE 4

बुद्ध सदा वैभव यश लीये. सुख सम्पति लक्ष्मी पसीजै। ॥ आरती श्री नवग्रहों की कीजै.. ॥

VERSE 5

विद्या बुद्धि ज्ञान गुरु से ले लो . प्रगति सदा मानव पै रीझे। ॥ आरती श्री नवग्रहों की कीजै.. ॥

VERSE 6

शुक्र तर्क विज्ञान बढावै. देश धर्म सेवा यश लीजे । ॥ आरती श्री नवग्रहों की कीजै.. ॥

VERSE 7

न्यायधीश शनि अति ज्यारे. जप तप श्रद्धा शनि को दीजै । ॥ आरती श्री नवग्रहों की कीजै.. ॥

VERSE 8

राहु मन का भरम हरावे. साथ न कबहु कुकर्म न दीजै । ॥ आरती श्री नवग्रहों की कीजै.. ॥

VERSE 9

स्वास्थ्य उत्तम केतु राखै. पराधीनता मनहित खीजै । ॥ आरती श्री नवग्रहों की कीजै.. ॥