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Aarti

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आरती श्री नरसिंह भगवान जी की

आरती कीजै नरसिंह कुँवर की।वेद विमल यश गाऊँ मेरे प्रभुजी॥ पहली आरती प्रह्लाद उबारे।हिरणाकुश नख उदर विदारे॥ दूसरी आरती वामन सेवा।बलि के द्वार पधारे हरि

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श्री नरसिंह भगवान की आरती

ॐ जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरे। स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे,जन का ताप हरे॥ ॐ जय नरसिंह हरे॥ तुम हो दीन

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श्री पुरुषोत्तम देव की आरती

जय पुरुषोत्तम देवा,स्वामी जय पुरुषोत्तम देवा। महिमा अमित तुम्हारी,सुर-मुनि करें सेवा॥ जय पुरुषोत्तम देवा॥ सब मासों में उत्तम,तुमको बतलाया। कृपा हुई जब हरि की,कृष्ण रूप

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आरती श्री सत्यनारायणजी की

जय लक्ष्मीरमणा श्री जय लक्ष्मीरमणा। सत्यनारायण स्वामी जनपातक हरणा॥ जय लक्ष्मीरमणा। रत्नजड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे। नारद करत निराजन घंटा ध्वनि बाजे॥ जय लक्ष्मीरमणा। प्रगट

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श्री शिवशंकरजी की आरती

हर हर हर महादेव! सत्य, सनातन, सुन्दर, शिव सबके स्वामी। अविकारी अविनाशी, अज अन्तर्यामी॥ हर हर हर महादेव! आदि, अनन्त, अनामय, अकल, कलाधारी। अमल, अरूप,

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श्री बाँकेबिहारी की आरती

श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ। कुन्जबिहारी तेरी आरती गाऊँ। श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ। श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥ मोर मुकुट प्रभु शीश पे सोहे।

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आरती श्री गणपति जी

गणपति की सेवा मंगल मेवा,सेवा से सब विघ्न टरैं। तीन लोक के सकल देवता,द्वार खड़े नित अर्ज करैं॥ गणपति की सेवा मंगल मेवा…॥ रिद्धि-सिद्धि दक्षिण

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आरती गजबदन विनायक की

आरती गजबदन विनायक की।सुर-मुनि-पूजित गणनायक की॥ आरती गजबदन विनायक की।सुर-मुनि-पूजित गणनायक की॥ आरती गजबदन विनायक की॥ एकदन्त शशिभाल गजानन,विघ्नविनाशक शुभगुण कानन। शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन,दुःखविनाशक सुखदायक की॥

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एकादशी माता जी की आरती

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता । विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ॐ।। तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति

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नटराज जी की आरती

सत सृष्टि तांडव रचयिता नटराज राज नमो नमः… हेआद्य गुरु शंकर पिता नटराज राज नमो नमः… गंभीर नाद मृदंगना धबके उरे ब्रह्मांडना नित होत नाद

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आरती श्री जगन्नाथ जी की

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी, परसत चरणारविन्द आपदा हरी। निरखत मुखारविंद आपदा हरी, कंचन धूप ध्यान ज्योति जगमगी। अग्नि कुण्डल घृत पाव सथरी। आरती.. देवन द्वारे

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जीण माता की आरती

ॐ जय श्री जीण माता, जय श्री जीण माता। जो ध्यावत जग झंझट, उसका कट जाता ।। ॐ जय।। रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि न्यारी।

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ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनन के संकट, छिन में दूर करे ।।ॐ।। जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का,

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आरती कुंजबिहारी की

आरती कुंजबिहारी की, गिरधर कृष्ण मुरारी की। गले में बैजन्ती माला, बजाये मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झल काला, नन्द के आनन्द नन्द लाला।

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गिरिराज जी की आरती

ॐ जय जय जय गिरिराज, स्वामी जय जय जय गिरिराज। संकट में तुम राखौ, निज भक्तन की लाज॥ ॐ जय॥ इन्द्रादिक सब सुर मिल तुम्हरौं

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परशुराम जी की आरती

ॐ जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी। सुर नर मुनिजन सेवत, श्रीपति अवतारी॥ ॐ जय” जमदग्नी सुत नर-सिंह, मां रेणुका जाया। मार्तण्ड भृगु वंशज, त्रिभुवन यश

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माँ बगलामुखी की आरती

जय जय श्री बगलामुखी माता. आरति करहूँ तुम्हारी॥ टेक॥ पीत वसन तन पर तव सोहै, कुण्डल की छबि न्यारी॥जय-जय” कर-कमलों में मुद्गर धारै, अस्तुति करहिं

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बाला जी की आरती

ॐ जय हनुमत वीरा स्वामी जय हनुमत वीरा, संकट मोचन स्वामी तुम हो रणधीरा॥ॐ॥ पवन-पुत्र अंजनी-सुत महिमा अति भारी, दुःख दरिद्र मिटाओ संकट सबहारी॥ॐ॥ बाल

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महावीर जी की आरती

जय महावीर प्रभो! स्वामी जय महावीर प्रभो! जगनायक सुखदायक, अति गम्भीर प्रभो॥ॐ॥ कुण्डलपुर में जन्में, त्रिशला के जाये। पिता सिद्धार्थ राजा, सुर नर हर्षाए॥ ॐ॥

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राणीसती जी की आरती

जय श्री राणी सती मैया, जय जगदम्ब सती जी। अपने भक्तजनों की दूर करो विपती॥जय. अपनि अनन्तर ज्योति अखण्डित मंडित चहुँककुंभा। दुरजन दलन खडग की,

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राधा जी की आरती

आरती श्री वृषभानुसुता की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की। त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि। पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दरतम छवि सुन्दरता की।

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