करते है जो भक्ति संकट मोचन हनुमान की

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करते है जो भक्ति संकट मोचन हनुमान की
उन्हें फिर संकट कैसा, उन्हें फिर संकट कैसा।।
पा लेते है कृपा जो भी हमसे कृपा निधान की,
उन्हें फिर संकट कैसा, उन्हें फिर संकट कैसा।।

मन मैं श्रद्धा लेकर नाम जो इनका गाते है
मिल जाती है दुःख से मुक्ति सच्चा आनंद पाते है
जिनको मिलती दया द्रष्टि सच्चे भक्त महान की
उन्हें फिर संकट कैसा, उन्हें फिर संकट कैसा।।

जीवन पथ में जिनका सहारा भक्तो संकट मोचन
ये समझो जीवन पथ में ना दुविधा ना उलझन

मिल जाती है ओट जिनको महावीर बलवान की
उन्हें फिर संकट कैसा, उन्हें फिर संकट कैसा।।

सागर संकट मोचन अपनो भक्तो रखवाला है
भक्ति की जो जाने शक्ति वो भी भक्त निराला है

मिल जाती जिनको युक्ति चतुर सुजान की
उन्हें फिर संकट कैसा, उन्हें फिर संकट कैसा।।

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Aarti

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