जनम सब बातनमें बित गयोरे

Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on whatsapp

जनम सब बातनमें बित गयोरे ॥ध्रु०॥
बार बरस गये लडकाई । बसे जोवन भयो ।
त्रिश बरस मायाके कारन देश बिदेश गयो ॥१॥
चालीस अंदर राजकुं पायो बढे लोभ नित नयो ।
सुख संपत मायाके कारण ऐसे चलत गयो ॥ जन० ॥२॥
सुकी त्वचा कमर भई ढिली, ए सब ठाठ भयो ।
बेटा बहुवर कह्यो न माने बुड ना शठजीहू भयो ॥ जन० ॥३॥
ना हरी भजना ना गुरु सेवा ना कछु दान दियो ।
सूरदास मिथ्या तन खोवत जब ये जमही आन मिल्यो ॥ जन०॥४॥

Comments

Sharing Is Karma

Share on facebook
Share
Share on twitter
Tweet
Share on linkedin
LinkedIn
Share on telegram
Telegram
Share on whatsapp
WhatsApp

Aarti

Articlesब्रह्मलेख