पवित्रा पहरत हे अनगिनती

पवित्रा पहरत हे अनगिनती। श्री वल्लभ के सन्मुख बैठे बेटा नाती पंती॥१॥ बीरा दे मुसिक्यात जात प्रभु बात बनावत बनती। वृंदावन सुख पाय व्रजवधु चिरजीयो जियो भनती॥२॥

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