भक्त को सुगम श्री यमुने अगम ओरें ।
प्रात ही न्हात अघजात ताकें सकल जमहुं रहत ताहि हाथ जोरे ॥१॥
अनुभवि बिना अनुभव कहा जानही जाको पिया नही चित्त चोरें ।
प्रेम के सिंधु को मरम जान्यो नही सूर कहे कहा भयो देह बोरे ॥२॥

Comments
Sharing Is Karma
Share
Tweet
LinkedIn
Telegram
WhatsApp

भक्त को सुगम श्री यमुने अगम ओरें

भक्त को सुगम श्री यमुने अगम ओरें । प्रात ही न्हात अघजात ताकें सकल जमहुं रहत ताहि हाथ जोरे ॥१॥ अनुभवि बिना अनुभव कहा जानही जाको पिया नही चित्त चोरें । प्रेम के सिंधु को मरम जान्यो नही सूर कहे कहा भयो देह बोरे ॥२॥

@beLikeBrahma

Join Brahma

Learn Sanatan the way it is!