मच गया शोर सारी नगरी रे

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मच गया शोर सारी नगरी रे, सारी नगरी रे
आया बिरज का बाँका, संभाल तेरी गगरी रे
अरे मच गया शोर…

देखो अरे देखो कहीं ऐसा न हो जाए
चोरी करे माखन तेरा जिया भी चुराए
अरे धमकाता है इतना तू किसको
डरता है कौन आने दे उसको
ऐसे न बहुत बोलो
मत ठुमक-ठुमक डोलो
चिल्लाओगी तब गोरी
जब उलट देगा तोरी
गगरी आ के बीच डगरी रे
मच गया शोर…

जाने क्या करता अगर होता कहीं गोरा
जा के जमुना में ज़रा शक्ल देखे छोरा
बिंदिया चमकाती रस्ते में न जा
मनचला भी है गोकुल का राजा
पड़ जाये नहीं पाला, राधा से कहीं लाला
फिर रोयेगा गोविंदा, मारेगी ऐसा फंदा
गर्दन से बंधेगी ऐसी चुनरी रे
मच गया शोर…

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Aarti

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