माधव के हाथ में जादू कि छडी है

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माधव के हाथ में जादू कि छडी है,
वाहे में जान मेरी अटकी पड़ी है – (2)
साँझ ढले कदम तले तेरे कन्हइया,
बंसी बजईया हो मेरा बंसी बजईया – (2)
बाँकी है चितवन बाँकी है मुस्कान,
बांके की बंसी छोड़े मर्म भेदी बाण
फूक मरे जादू डारे दइया रे दइया रे
बंसी बजईया हो मेरा बंसी बजईया – (2)
नींद हारे चैन हरे सुध बुध हारे,
बास हरे बांसी घाव हरे करे,
तंग दिन रात करे मुहलगी बंसी,
जब तब उतपात करे मुहलगी बंसी,
बढ़ चढ़ के बात करे मुँहलगी बंसी,
प्राणो पर घात करे मुँहलगी बंसी,
फिर भी हमें प्यारो लगे नन्द को छइया – (2)
बंसी बजैया हो मेरा बंसी बजैया
बंसी बजैया हो सखी बंसी बजैया
नाम पे रसपान के विषपान किये जाए,
बंसी के तान पे मिटने को जिए जाए,
कुल की मर्यादा मान करदिये स्वाहा,
लाज काज ज्ञान ध्यान करदिए स्वाहा,
सब सुख तिनके सामान करदिये स्वाहा,
किंतु नही मोल जाने मोल लगइया
बंसी बजईया हो सखी बंसी बजईया – (2)
माधव के हाथ में जादू कि छडी है,
वाहे में जान मेरी अटकी पड़ी है,
बंसी बजईया हो मेरा बंसी बजईया,
बंसी बजईया हो सखी बंसी बजईया,
बाँकी है चितवन बाँकी है मुस्कान,
बांके की बंसी छोड़े मर्म भेदी बाण,
फूक मारे जादू डारे दइया रे दइया रे -(2)
बंसी बजईया हो मेरा बंसी बजईया
बंसी बजईया हो मेरा बंसी बजईया

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