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श्री पंचमुखी हनुमान, बिरद के बंका, शब्द के सांचा।
जहाँ आप खड़े महाराज, असुर दल काँपा।।

क्या संमन्दर का गर्व करे, ज्यान कर ज्याऊँ फंका।
म्हारे धणी का हुकम नहीं, थारी ले ज्यातो लंका।।
श्री पंचमुखी हनुमान…

सागर ऊपर शिला तिरायी, करया बहुत हंका।
मंदोदरी का महल उजाड़्या, मद् मारया रावण का।।
श्री पंचमुखी हनुमान…

राम-लक्ष्मण की जोत विराजे, तुम अगवानी हर का।
मायारूपी जोत स्वरूपी, नाम बड़ा हनुमत का।।
श्री पंचमुखी हनुमान…

धन-धन थारी भगती करे, ज्याने दर्शन पावे नित का।
सबके ह्रदय आप विराजे, दुख मेटे जन-जन का।।
श्री पंचमुखी हनुमान..

रामानन्द बिरामण गावे, शहर कोजपुर का।
जिनके ऊपर कृपा किरज्यो, चाकर चरणन का।।
श्री पंचमुखी हनुमान…

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