हालरौ हलरावै माता ।
बलि बलि जाऊँ घोष सुख दाता ॥१॥
जसुमति अपनो पुन्य बिचारै ।
बार बार सिसु बदन निहारै ॥२॥
अँग फरकाइ अलप मुसकाने ।
या छबि की उपना को जानै ॥३॥
हलरावति गावति कहि प्यारे ।
बाल दसा के कौतुक भारे ॥४॥

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हालरौ हलरावै माता

हालरौ हलरावै माता । बलि बलि जाऊँ घोष सुख दाता ॥१॥ जसुमति अपनो पुन्य बिचारै । बार बार सिसु बदन निहारै ॥२॥ अँग फरकाइ अलप मुसकाने । या छबि की उपना को जानै ॥३॥ हलरावति गावति कहि प्यारे । बाल दसा के कौतुक भारे ॥४॥

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