बाबा भोले बाबा भोले भंडारी आये दर पे तेरे पुजारी

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बाबा भोले बाबा भोले भंडारी आये दर पे तेरे पुजारी
जय सोमेष्वर जय भूमेश्वर जय कैलाशी जय अभिलाषी
प्रभु मेरे मन को बना दे शिवाला,
तेरे नाम की मैं जपूं रोज माला।

प्रभु मेरे मन को बना दे शिवाला,
तेरे नाम की मैं जपूं रोज माला।
अब तो मनो कामना है यह मेरी,
जिधर देखूं आए नज़र डमरू वाला॥

प्रभु मेरे मन को बना दे शिवाला,
तेरे नाम की मैं जपूं रोज माला।

कहीं और क्यूँ ढूँढने तुझ को जाऊं,
प्रभु मन के भीतर ही मैं तुझ को पाऊं।
यह मन का शिवाला हो सब से निराला,
जिधर देखूं आए नज़र डमरू वाला॥

प्रभु मेरे मन को बना दे शिवाला,
तेरे नाम की मैं जपूं रोज माला।

भक्ति पे अपनी है विश्वास मुझको,
बनाएगा चरणों का तू दास मुझको।
मैं तुझ से जुदा अब नहीं रहने वाला,
जिधर देखूं आए नज़र डमरू वाला॥

प्रभु मेरे मन को बना दे शिवाला,
तेरे नाम की मैं जपूं रोज माला।

तू दर्पण सा उजला मेरे मन को करदे,
तू अपना उजाला मेरे मन में भरदे।
हैं चारो दिशाओं में तेरा उजाला,
जिधर देखूं आए नज़र डमरू वाला॥

प्रभु मेरे मन को बना दे शिवाला,
तेरे नाम की मैं जपूं रोज माला।
अब तो मनो कामना है यह मेरी,
जिधर देखूं आए नज़र डमरू वाला॥

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Bhajanब्रह्मभजन

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ॐ नमः शिवाय

सोभित कर नवनीत लिए

नीके रहियौ जसुमति मैया

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

हरि हैं राजनीति पढि आए

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

रानी तेरो चिरजीयो गोपाल

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

जसुमति दौरि लिये हरि कनियां

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प्रभु किरपा कीजौ

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

मधुरीसी बेन बजायके

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बृंदाबन का कृष्ण कन्हैया

उधो, मन न भए दस बीस

ऐसैं मोहिं और कौन पहिंचानै

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

राधा प्यारी कह्यो सखिन सों सांझी धरोरी माई

सोभित कर नवनीत लिए

रे मन कृष्ण नाम कहि लीजै

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