बरसै बदरिया सावन की

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बरसै बदरिया सावन की
सावन की मनभावन की।

सावन में उमग्यो मेरो मनवा
भनक सुनी हरि आवन की।

उमड़ घुमड़ चहुं दिसि से आयो
दामण दमके झर लावन की।

नान्हीं नान्हीं बूंदन मेहा बरसै
सीतल पवन सोहावन की।

मीराके प्रभु गिरधर नागर
आनंद मंगल गावन की।

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Bhajanब्रह्मभजन

उधो, मन न भए दस बीस

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उधो, मन न भए दस बीस

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आज मारे साधुजननो संगरे राणा

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

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उधो, मन न भए दस बीस

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उधो, मन न भए दस बीस

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अबिगत गति कछु कहति न आवै।

अबिगत गति कछु कहति न आवै

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