केत्ते गये जखमार भजनबिना

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केत्ते गये जखमार भजनबिना केत्ते गये० ॥ध्रु०॥
प्रभाते उठी नावत धोवत पालत है आचार ॥ भज०॥१॥
दया धर्मको नाम न जाण्यो ऐसो प्रेत चंडाल ॥ भज०॥२॥
आप डुबे औरनकूं डुबाये चले लोभकी लार ॥ भज०॥३॥
माला छापा तिलक बनायो ठग खायो संसार ॥ भज०॥४॥
सूरदास भगवंत भजन बिना पडे नर्कके द्वार ॥ भज०॥५॥

सोभित कर नवनीत लिए
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Bhajanब्रह्मभजन

सोभित कर नवनीत लिए

मन धन-धाम धरे

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श्याम मोसूँ ऐंडो डोलै हो

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तोरी सावरी सुरत नंदलालाजी

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आज बृज में होरी रे रसिया

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

आनि सँजोग परै

उधो, मन न भए दस बीस

नाथ, अनाथन की सुधि लीजै।

सोभित कर नवनीत लिए

मन तोसों कोटिक बार कहीं

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लाज रखो तुम मेरी प्रभूजी

उधो, मन न भए दस बीस

कब तुम मोसो पतित उधारो

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तेरे दर का मैं बनके सवाली

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

देखो ऐसो हरी सुभाव

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