मैया रानी जो आने का वादा करो

Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on whatsapp

मैया रानी जो आने का वादा करो,
मै यूँहीं रोज कुटिया सजाता रहूं,
अपनी पलकों से चुन चुन के कांटे सभी,
तेरी राहो में कलियाँ बिछाता रहूं,
मैया रानी जो आने का वादा करो,
मै यूँहीं रोज कुटिया सजाता रहूं।।

कितना सुन्दर लगे मेरी माँ का भवन,
स्वर्ग में भी तो ऐसा नजारा नहीं,
माँ की खातिर में सारा जगत छोड़ दूँ,
इसके चरणों से उठना गवारा नहीं,
माँ अगर मेरी नजरो के आगे रहे,
मन के मंदिर में इसको बसाता रहूं,
अपनी पलकों से चुन चुन के कांटे सभी,
तेरी राहो में कलियाँ बिछाता रहूं,
मैया रानी जो आने का वादा करो,
मै यूँहीं रोज कुटिया सजाता रहूं।।

अपने भक्तो पे ममता लुटाती है जो,
माँ तुम्ही तो वो ममता की तस्वीर हो,
माँ बनाती हो बिगड़ा मुक्कदर तुम्ही,
और तुम्ही अपने भक्तो की तक़दीर हो,
तुम यूँही मुझपे ममता लुटाती रहो,
अपना तन मन में तुम पर लुटाता रहूं,
अपनी पलकों से चुन चुन के कांटे सभी,
तेरी राहो में कलियाँ बिछाता रहूं,
मैया रानी जो आने का वादा करो,
मै यूँहीं रोज कुटिया सजाता रहूं।।

आदिशक्ति है तू मेरी भक्ति है तू,
मैं हूँ पापी अगर करुणाकारी है तू,
शिव की अर्धांगिनी है महामाई तू,
रानी महारानी आदिकुमारी है तू,
मन ये चाहे मेरा तेरे दरबार में,
बस भजन तेरे दिन रेन गाता रहूं,
अपनी पलकों से चुन चुन के कांटे सभी,
तेरी राहो में कलियाँ बिछाता रहूं,
मैया रानी जो आने का वादा करो,
मै यूँहीं रोज कुटिया सजाता रहूं।।

मैया रानी जो आने का वादा करो,
मै यूँहीं रोज कुटिया सजाता रहूं,
अपनी पलकों से चुन चुन के कांटे सभी,
तेरी राहो में कलियाँ बिछाता रहूं,
मैया रानी जो आने का वादा करो,
मै यूँहीं रोज कुटिया सजाता रहूं।।

maiya raanee jo aane ka vaada karo
Explore all Bhajan of Durga

Comments

Sharing Is Karma

Share on facebook
Share
Share on twitter
Tweet
Share on linkedin
LinkedIn
Share on telegram
Telegram
Share on whatsapp
WhatsApp

Bhajanब्रह्मभजन

IMG_8665

मैया मोरी, मैं नहीं माखन खायो

उधो, मन न भए दस बीस

जागो पीतम प्यारा लाल

IMG_8661

रोम रोम में बसनेवाले राम

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

तुमको कमलनयन कबी गलत

उधो, मन न भए दस बीस

अब मेरी राखौ लाज, मुरारी

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

हम भगतनि के भगत हमारे

IMG_8665

आज बृज में होरी रे रसिया

IMG_8760

चरन रज महिमा मैं जानी

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

जागिये ब्रजराज कुंवर

सोभित कर नवनीत लिए

केत्ते गये जखमार भजनबिना

ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र

गौरा जी के लाडले, तुम सबके आधार

Shlokब्रह्मश्लोक

Collectionब्रह्मसंग्रह

!! भारतीय ज्ञान और परंपरा का एक प्रगतिशील संग्रहालय  !!

Articlesब्रह्मलेख