ऊधौ,तुम हो अति बड़भागी

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ऊधौ,तुम हो अति बड़भागी
अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी
पुरइनि पात रहत जल भीतर,ता रस देह न दागी
ज्यों जल मांह तेल की गागरि,बूँद न ताकौं लागी
प्रीति-नदी में पाँव न बोरयौ,दृष्टि न रूप परागी
‘सूरदास’ अबला हम भोरी, गुर चाँटी ज्यों पागी

अबिगत गति कछु कहति न आवै।
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नारी दूरत बयाना रतनारे

उधो, मन न भए दस बीस

मो परतिग्या रहै कि जाउ

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श्री राम जय राम जय जय राम

उधो, मन न भए दस बीस

चोरी मोरी गेंदया

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ॐ जय श्री राधा जय श्री कृष्ण

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

हम भगतनि के भगत हमारे

उधो, मन न भए दस बीस

माधव कत तोर करब बड़ाई

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तनक हरि चितवौ जी मोरी ओर

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

रे मन मूरख, जनम गँवायौ

उधो, मन न भए दस बीस

जयजय नारायण ब्रह्मपरायण

अबिगत गति कछु कहति न आवै।

दोउ भैया मांगत मैया पें देरी मैया दधि माखन रोटी

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