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Bhajan

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बोले माई गोवर्धन पर मुरवा

बोले माई गोवर्धन पर मुरवा । तेसी ये श्यामघन मुरली बजाई, तेसेई उठे झुमधुरवा ॥१॥ बडी बडी बूंदन वरषन लाग्यो, पवन चलत अति झुरवा। सूरदास

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देखो माई ये बडभागी मोर

देखो माई ये बडभागी मोर। जिनकी पंख को मुकुट बनत है, शिर धरें नंदकिशोर॥१॥ ये बडभागी नंद यशोदा, पुन्य कीये भरझोर। वृंदावन हम क्यों न

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पवित्रा पहरे को दिन आयो

पवित्रा पहरे को दिन आयो। केसर कुमकुम रसरंग वागो कुंदन हार बनायो॥१॥ जय जयकार होत वसुधा पर सुर मुनि मंगल गायो। पतित पवित्र किये सुख

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पवित्रा श्री विट्ठलेश पहरावे

पवित्रा श्री विट्ठलेश पहरावे। व्रज नरेश गिरिधरन चंद्र को निरख निरख सचु पावे॥१॥ आसपास युवतिजन ठाडी हरखित मंगल गावे। गोविंद प्रभु पर सकल देवता कुसुमांजलि

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पवित्रा पहरत हे अनगिनती

पवित्रा पहरत हे अनगिनती। श्री वल्लभ के सन्मुख बैठे बेटा नाती पंती॥१॥ बीरा दे मुसिक्यात जात प्रभु बात बनावत बनती। वृंदावन सुख पाय व्रजवधु चिरजीयो

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देखो री हरि भोजन खात

देखो री हरि भोजन खात। सहस्त्र भुजा धर इत जेमत हे दूत गोपन से करत हे बात॥१॥ ललिता कहत देख हो राधा जो तेरे मन

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ग्वालिन

ग्वालिन मेरी गेंद चुराई। खेलत आन परी पलका पर अंगिया मांझ दुराई॥१॥ भुज पकरत मेरी अंगिया टटोवत छुवत छंतिया पराई। सूरदास मोही एही अचंबो एक

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मलार मठा खींच को लोंदा

मलार मठा खींच को लोंदा। जेवत नंद अरु जसुमति प्यारो जिमावत निरखत कोदा॥ माखन वरा छाछ के लीजे खीचरी मिलाय संग भोजन कीजे॥ सखन सहित

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राधे जू आज बन्यो है वसंत

शयन भोग के समय राधे जू आज बन्यो है वसंत। मानो मदन विनोद विहरत नागरी नव कंत॥१॥ मिलत सन्मुख पाटली पट मत्त मान जुही। बेली

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चिरजीयो होरी को रसिया

चिरजीयो होरी को रसिया चिरजीयो। ज्यों लो सूरज चन्द्र उगे है, तो लों ब्रज में तुम बसिया चिरजीयो ॥१॥ नित नित आओ होरी खेलन को,

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ऐसो पूत देवकी जायो

ऐसो पूत देवकी जायो। चारों भुजा चार आयुध धरि, कंस निकंदन आयो ॥१॥ भरि भादों अधरात अष्टमी, देवकी कंत जगायो। देख्यो मुख वसुदेव कुंवर को,

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जागिये ब्रजराज कुंवर

जागिये ब्रजराज कुंवर कमल कोश फूले। कुमुदिनी जिय सकुच रही, भृंगलता झूले॥१॥ तमचर खग रोर करत, बोलत बन मांहि। रांभत गऊ मधुर नाद, बच्छन हित

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औरन सों खेले धमार

औरन सों खेले धमार श्याम मोंसों मुख हू न बोले। नंदमहर को लाडिलो मोसो ऐंठ्यो ही डोले॥१॥ राधा जू पनिया निकसी वाको घूंघट खोले। ’सूरदास’

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प्रात समय नवकुंज महल

प्रात समय नवकुंज महल में श्री राधा और नंदकिशोर ॥ दक्षिणकर मुक्ता श्यामा के तजत हंस अरु चिगत चकोर ॥१॥ तापर एक अधिक छबि उपजत

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