>
>
Page 3

Bhajan

Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on whatsapp

मेरो कान्ह कमलदललोचन

मेरो कान्ह कमलदललोचन। अब की बेर बहुरि फिरि आवहु, कहा लगे जिय सोचन॥ यह लालसा होति हिय मेरे, बैठी देखति रैहौं॥ गाइ चरावन कान्ह कुंवर

Read  ➜

संदेसो दैवकी सों कहियौ

संदेसो दैवकी सों कहियौ। `हौं तौ धाय तिहारे सुत की, मया करति नित रहियौ॥ जदपि टेव जानति तुम उनकी, तऊ मोहिं कहि आवे। प्रातहिं उठत

Read  ➜

मुरली गति बिपरीत कराई

मुरली गति बिपरीत कराई। तिहुं भुवन भरि नाद समान्यौ राधारमन बजाई॥ बछरा थन नाहीं मुख परसत, चरत नहीं तृन धेनु। जमुना उलटी धार चली बहि,

Read  ➜

वृच्छन से मत ले

वृच्छन से मत ले, मन तू वृच्छन से मत ले। काटे वाको क्रोध न करहीं, सिंचत न करहीं नेह॥ धूप सहत अपने सिर ऊपर, और

Read  ➜

नटवर वेष काछे स्याम

नटवर वेष काछे स्याम। पदकमल नख-इन्दु सोभा, ध्यान पूरनकाम॥ जानु जंघ सुघट निकाई, नाहिं रंभा तूल। पीतपट काछनी मानहुं जलज-केसरि झूल॥ कनक-छुद्वावली पंगति नाभि कटि

Read  ➜

नैन भये बोहित के काग

नैन भये बोहित के काग। उड़ि उड़ि जात पार नहिं पावैं, फिरि आवत इहिं लाग॥ ऐसी दसा भई री इनकी, अब लागे पछितान। मो बरजत

Read  ➜

जौ बिधिना अपबस करि पाऊं

जौ बिधिना अपबस करि पाऊं। तौ सखि कह्यौ हौइ कछु तेरो, अपनी साध पुराऊं॥ लोचन रोम-रोम प्रति मांगों पुनि-पुनि त्रास दिखाऊं। इकटक रहैं पलक नहिं

Read  ➜

जसुमति दौरि लिये हरि कनियां

जसुमति दौरि लिये हरि कनियां। “आजु गयौ मेरौ गाय चरावन, हौं बलि जाउं निछनियां॥ मो कारन कचू आन्यौ नाहीं बन फल तोरि नन्हैया। तुमहिं मिलैं

Read  ➜

आई छाक बुलाये स्याम

आई छाक बुलाये स्याम। यह सुनि सखा सभै जुरि आये, सुबल सुदामा अरु श्रीदाम॥ कमलपत्र दौना पलास के सब आगे धरि परसत जात। ग्वालमंडली मध्यस्यामधन

Read  ➜

मेरी माई, हठी बालगोबिन्दा

मेरी माई, हठी बालगोबिन्दा। अपने कर गहि गगन बतावत, खेलन कों मांगै चंदा॥ बासन के जल धर्‌यौ, जसोदा हरि कों आनि दिखावै। रुदन करत ढ़ूढ़ै

Read  ➜

खेलत नंद-आंगन गोविन्द

खेलत नंद-आंगन गोविन्द। निरखि निरखि जसुमति सुख पावति बदन मनोहर चंद॥ कटि किंकिनी, कंठमनि की द्युति, लट मुकुता भरि माल। परम सुदेस कंठ के हरि

Read  ➜

भजु मन चरन संकट-हरन

भजु मन चरन संकट-हरन। सनक, संकर ध्यान लावत, सहज असरन-सरन॥ सेस, सारद, कहैं नारद संत-चिन्तन चरन। पद-पराग-प्रताप दुर्लभ, रमा के हित-करन॥ परसि गंगा भई पावन,

Read  ➜

मन तोसों कोटिक बार कहीं

मन तोसों कोटिक बार कहीं। समुझि न चरन गहे गोविन्द के, उर अघ-सूल सही॥ सुमिरन ध्यान कथा हरिजू की, यह एकौ न रही। लोभी लंपट

Read  ➜

जापर दीनानाथ ढरै

जापर दीनानाथ ढरै। सोई कुलीन, बड़ो सुन्दर सिइ, जिहिं पर कृपा करै॥ राजा कौन बड़ो रावन तें, गर्वहिं गर्व गरै। कौन विभीषन रंक निसाचर, हरि

Read  ➜

मो सम कौन कुटिल खल कामी

मो सम कौन कुटिल खल कामी। जेहिं तनु दियौ ताहिं बिसरायौ, ऐसौ नोनहरामी॥ भरि भरि उदर विषय कों धावौं, जैसे सूकर ग्रामी। हरिजन छांड़ि हरी-विमुखन

Read  ➜

रे मन, राम सों करि हेत

रे मन, राम सों करि हेत। हरिभजन की बारि करिलै, उबरै तेरो खेत॥ मन सुवा, तन पींजरा, तिहि मांझ राखौ चेत। काल फिरत बिलार तनु

Read  ➜

है हरि नाम कौ आधार

है हरि नाम कौ आधार। और इहिं कलिकाल नाहिंन रह्यौ बिधि-ब्यौहार॥ नारदादि सुकादि संकर कियौ यहै विचार। सकल स्रुति दधि मथत पायौ इतौई घृत-सार॥ दसहुं

Read  ➜

है हरि नाम कौ आधार

है हरि नाम कौ आधार। और इहिं कलिकाल नाहिंन रह्यौ बिधि-ब्यौहार॥ नारदादि सुकादि संकर कियौ यहै विचार। सकल स्रुति दधि मथत पायौ इतौई घृत-सार॥ दसहुं

Read  ➜

कहावत ऐसे दानी दानि

कहावत ऐसे दानी दानि। चारि पदारथ दिये सुदामहिं, अरु गुरु को सुत आनि॥ रावन के दस मस्तक छेद, सर हति सारंगपानि। लंका राज बिभीषन दीनों

Read  ➜

धोखैं ही धोखैं डहकायौ

धोखैं ही धोखैं डहकायौ। समुझी न परी विषय रस गीध्यौ, हरि हीरा घर मांझ गंवायौं॥ क्यौं कुरंग जल देखि अवनि कौ, प्यास न गई, दसौं

Read  ➜

तुम्हारी भक्ति हमारे प्रान

तुम्हारी भक्ति हमारे प्रान। छूटि गये कैसे जन जीवै, ज्यौं प्रानी बिनु प्रान॥ जैसे नाद-मगन बन सारंग, बधै बधिक तनु बान। ज्यौं चितवै ससि ओर

Read  ➜

जौलौ सत्य स्वरूप न सूझत

जौलौ सत्य स्वरूप न सूझत। तौलौ मनु मनि कंठ बिसारैं, फिरतु सकल बन बूझत॥ अपनो ही मुख मलिन मंदमति, देखत दरपन माहीं। ता कालिमा मेटिबै

Read  ➜

सरन गये को को न उबार्‌यो

सरन गये को को न उबार्‌यो। जब जब भीर परीं संतति पै, चक्र सुदरसन तहां संभार्‌यौ। महाप्रसाद भयौ अंबरीष कों, दुरवासा को क्रोध निवार्‌यो॥ ग्वालिन

Read  ➜

माधवजू, जो जन तैं बिगरै

माधवजू, जो जन तैं बिगरै। तउ कृपाल करुनामय केसव, प्रभु नहिं जीय धर॥ जैसें जननि जठर अन्तरगत, सुत अपराध करै। तोऊ जतन करै अरु पोषे,

Read  ➜

सोइ रसना जो हरिगुन गावै

सोइ रसना जो हरिगुन गावै। नैननि की छवि यहै चतुरता जो मुकुंद मकरंदहिं धावै॥ निर्मल चित तौ सोई सांचो कृष्ण बिना जिहिं और न भावै।

Read  ➜

सोइ रसना जो हरिगुन गावै

सोइ रसना जो हरिगुन गावै। नैननि की छवि यहै चतुरता जो मुकुंद मकरंदहिं धावै॥ निर्मल चित तौ सोई सांचो कृष्ण बिना जिहिं और न भावै।

Read  ➜

आछो गात अकारथ गार्‌यो

आछो गात अकारथ गार्‌यो। करी न प्रीति कमललोचन सों, जनम जनम ज्यों हार्‌यो॥ निसदिन विषय बिलासिन बिलसत फूटि गईं तुअ चार्‌यो। अब लाग्यो पछितान पाय

Read  ➜

कब तुम मोसो पतित उधारो

कब तुम मोसो पतित उधारो। पतितनि में विख्यात पतित हौं पावन नाम तिहारो॥ बड़े पतित पासंगहु नाहीं, अजमिल कौन बिचारो। भाजै नरक नाम सुनि मेरो,

Read  ➜

अब हों नाच्यौ बहुत गोपाल

अब हों नाच्यौ बहुत गोपाल। काम क्रोध कौ पहिरि चोलना, कंठ विषय की माल॥ महामोह के नूपुर बाजत, निन्दा सब्द रसाल। भरम भर्‌यौ मन भयौ

Read  ➜

अब कै माधव, मोहिं उधारि

अब कै माधव, मोहिं उधारि। मगन हौं भव अम्बुनिधि में, कृपासिन्धु मुरारि॥ नीर अति गंभीर माया, लोभ लहरि तरंग। लियें जात अगाध जल में गहे

Read  ➜

प्रभु, हौं सब पतितन कौ राजा

प्रभु, हौं सब पतितन कौ राजा। परनिंदा मुख पूरि रह्यौ जग, यह निसान नित बाजा॥ तृस्ना देसरु सुभट मनोरथ, इंद्रिय खड्ग हमारे। मंत्री काम कुमत

Read  ➜

प्रभु, मेरे औगुन न विचारौ

प्रभु, मेरे औगुन न विचारौ। धरि जिय लाज सरन आये की रबि-सुत-त्रास निबारौ॥ जो गिरिपति मसि धोरि उदधि में लै सुरतरू निज हाथ। ममकृत दोष

Read  ➜

अबिगत गति कछु कहति न आवै

अबिगत गति कछु कहति न आवै। ज्यों गूंगो मीठे फल की रस अन्तर्गत ही भावै॥ परम स्वादु सबहीं जु निरन्तर अमित तोष उपजावै। मन बानी

Read  ➜

चरन कमल बंदौ हरि राई

चरन कमल बंदौ हरि राई। जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै, आंधर कों सब कछु दरसाई॥ बहिरो सुनै, मूक पुनि बोलै, रंक चले सिर छत्र धराई।

Read  ➜

प्रीति करि काहू सुख न लह्यो

प्रीति करि काहू सुख न लह्यो। प्रीति पतंग करी दीपक सों आपै प्रान दह्यो।। अलिसुत प्रीति करी जलसुत सों¸ संपति हाथ गह्यो। सारंग प्रीति करी

Read  ➜

अंखियां हरि–दरसन की प्यासी

अंखियां हरि–दरसन की प्यासी। देख्यौ चाहति कमलनैन कौ¸ निसि–दिन रहति उदासी।। आए ऊधै फिरि गए आंगन¸ डारि गए गर फांसी। केसरि तिलक मोतिन की माला¸

Read  ➜

मधुकर! स्याम हमारे चोर

मधुकर! स्याम हमारे चोर। मन हरि लियो सांवरी सूरत¸ चितै नयन की कोर।। पकरयो तेहि हिरदय उर–अंतर प्रेम–प्रीत के जोर। गए छुड़ाय छोरि सब बंधन

Read  ➜

चरन कमल बंदौ हरिराई

चरन कमल बंदौ हरिराई । जाकी कृपा पंगु गिरि लंघे,अंधे को सब कछु दरसाई ॥१॥ बहरो सुने मूक पुनि बोले,रंक चले सिर छत्र धराई ।

Read  ➜

निसिदिन बरसत नैन हमारे

निसिदिन बरसत नैन हमारे। सदा रहत पावस ऋतु हम पर, जबते स्याम सिधारे।। अंजन थिर न रहत अँखियन में, कर कपोल भये कारे। कंचुकि-पट सूखत

Read  ➜

ऊधौ, कर्मन की गति न्यारी

ऊधौ, कर्मन की गति न्यारी। सब नदियाँ जल भरि-भरि रहियाँ सागर केहि बिध खारी॥ उज्ज्वल पंख दिये बगुला को कोयल केहि गुन कारी॥ सुन्दर नयन

Read  ➜

भोरहि सहचरि कातर दिठि

भोरहि सहचरि कातर दिठि हेरि छल छल लोचन पानि । अनुखन राधा राधा रटइत आधा आधा बानि ।। राधा सयँ जब पनितहि माधव, माधव सयँ

Read  ➜

हरि पालनैं झुलावै

जसोदा हरि पालनैं झुलावै। हलरावै दुलरावै मल्हावै जोइ सोइ कछु गावै॥ मेरे लाल को आउ निंदरिया काहें न आनि सुवावै। तू काहै नहिं बेगहिं आवै

Read  ➜

भाव भगति है जाकें

भाव भगति है जाकें रास रस लीला गाइ सुनाऊं। यह जस कहै सुनै मुख स्त्रवननि तिहि चरनन सिर नाऊं॥ कहा कहौं बक्ता स्त्रोता फल इक

Read  ➜

प्रीति करि काहु सुख न लह्यो

प्रीति करि काहु सुख न लह्यो। प्रीति पतंग करी दीपक सों, आपै प्रान दह्यो॥ अलिसुत प्रीति करी जलसुत सों, संपति हाथ गह्यो। सारँग प्रीति करी

Read  ➜

Namaste Vanakkam Sat Srī Akāl Namaskārām Khurumjari Parnām Tashi Delek Khurumjari 

Join The Change
Resend OTP (00:30)
OR

Search