Ye Dipawali Sanatan Wali - Brahma Dipawali 2020
invites you to

ये दीपावली,

वाली

Join millions in celebrating the change
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A global campaign for strengthen Dharma, If you invite one Sanatani we are good.

Let’s Sankalp for  prosperity this diwali

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"Celebrate with a different state’s theme"

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"Safe and Conscious Shopping"

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"Visit a farmer for direct purchase"

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"Share your fireworks with who cant afford"

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"No Chinese lights this time"

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"Buy only swadeshi Products"

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"No Liquor No Gambling"

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"Use only Local made Diyas"

The world is changing fast, this Deepawali let’s change our fortune. if every one of us takes their Sankalp’s seriously, this Deepawali will create history for future generations.

Did you know?

Ye Dipawali Sanatan Wali - Brahma Dipawali 2020
Do check your crackers this time.

There is a very high chance that your fire-crackers are from Sivakasi, a town in Tamil Nadu. This city fulfils 90% crackers demand in-country during Diwali. Sivakasi employs over 2,50,000 people with an estimated turn over of ₹20 billion (US$280 million).

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Diwali date repeats after every 19 years.

Only as per the Christian calendar, In 2019, Deepawali celebrated on 27th October 2019. Earlier, it came on 27th October in 2000 and 1981. Check Diwali dates for 2001 if you want to cross-check.

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The foundation of the Golden Temple was laid on Diwali

Guru Amar Das institutionalized this as one of the special days when all Sikhs would gather to receive the Gurus blessings at Goindwal. In 1577 the foundation stone of The Golden Temple was laid on Diwali.

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A 15 day Diwali celebration outside Bharat.

Leicester, a city in the UK hosts the grand Diwali celebration outside India in a traditional way. Its a 15-days long celebration and a special 110-foot Ferris wheel, which is fondly called the Diwali Wheel of Light in temporary Diwali Village.

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Who all Celebrate Diwali?

Diwali is a major festival of all Dharmic religions, Hindu, Sikh, Jain, and Baudh. But, it is celebrated with the same enthusiasm in many ancient tribes in asia and many modern societies worldwide.

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How many countries celebrate Deepawali?

Other than India Deepawali is a national holiday also in Trinidad & Tobago, Myanmar, Nepal, Mauritius, Guyana, Singapore, Suriname, Malaysia, Sri Lanka and Fiji. And is an optional holiday in Pakistan. Also, Grand celebration takes place in many other countries including Dubai.

Let's Showcase our art & Culture

A global contest to showcase our creativity, art, culture & diversity. More details are coming soon. Join for more updates. 

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The Contests will run on Fb, Instagram, Twitter & Youtube. You can also email your entries at iam@brah.ma or whatsapp at +91-72108-51108.

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Deepawali Mantra

!! युग – युगांतर से कर्त्तव्य पथ का मार्गदर्शन करने वाले ब्रह्मवाक्य !!

 असतो मा सद्गमयतमसो मा ज्योतिर्गमय ।
मृत्योर्मा अमृतं गमय शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

Adhyay 1.3
Shloka 28
हे प्रभु! मुझे असत्य से सत्य की ओर । मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर । और मुझे मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
O Lord! Lead me from ignorance to truth, Lead me from darkness to light, Lead me from death to deathlessness, Aum peace, peace, peace.
ஏய் ஆண்டவரே! அறியாமையிலிருந்து சத்தியத்திற்கு எங்களை வழிநடத்துங்கள், இருளில் இருந்து வெளிச்சத்திற்கு எங்களை இட்டுச் செல்லுங்கள், மரணத்திலிருந்து அழியாத நிலைக்கு இட்டுச் செல்லுங்கள். ॐ அமைதி, அமைதி, அமைதி.
ਹੇ ਸੁਆਮੀ, ਸਾਨੂੰ ਅਗਿਆਨਤਾ ਤੋਂ ਸੱਚ ਵੱਲ ਲੈ ਜਾਵੋ, ਹਨੇਰੇ ਤੋਂ ਚਾਨਣ ਵੱਲ ਲੈ ਜਾਵੋ, ਮੌਤ ਤੋਂ ਸਾਨੂੰ ਅਮਰਤਾ ਵੱਲ ਲੈ ਜਾਵੋ, ॐ ਸ਼ਾਂਤੀ, ਸ਼ਾਂਤੀ, ਸ਼ਾਂਤੀ
ହେ ପ୍ରଭୁ, ଆମକୁ ଅଜ୍ଞତାରୁ ସତ୍ୟକୁ ନେଇଯାଅ, ଅନ୍ଧକାରରୁ ଆଲୋକକୁ ନେଇଯାଅ, ମୃତ୍ୟୁରୁ ଅମରତାକୁ, ॐ ଶାନ୍ତି, ଶାନ୍ତି, ଶାନ୍ତି |
ಓ ಸ್ವಾಮಿ, ನಮ್ಮನ್ನು ಅಜ್ಞಾನದಿಂದ ಸತ್ಯಕ್ಕೆ ಕರೆದೊಯ್ಯಿರಿ, ನಮ್ಮನ್ನು ಕತ್ತಲೆಯಿಂದ ಬೆಳಕಿಗೆ ಕರೆದೊಯ್ಯಿರಿ, ಸಾವಿನಿಂದ ಅಮರತ್ವಕ್ಕೆ ನಮ್ಮನ್ನು ಕರೆದೊಯ್ಯಿರಿ, ॐ ಶಾಂತಿ, ಶಾಂತಿ, ಶಾಂತಿ.
הו, אדון, הוביל אותנו מבורות לאמת, הוביל אותנו מחושך לאור, הוביל אותנו ממוות לאלמוות, ॐ שלום, שלום, שלום.
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इस संसार में असंख्य व्यक्ति ऐसे हैं जो साधन संपन्न होने पर भी चिंतित और उद्विग्न दिखाई देते हैं । यदि गहराई से देखा जाए तो जो जितना साधन संपन्न और सुविधाओं से भरा-पूरा है, वह उतना ही व्यग्र चिंतित और विकल दिखाई देता है । इसके विपरीत कम साधनों और अभाव वाले व्यक्ति मस्त...
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Wish Deepawali with a bang.

Collectionब्रह्मसंग्रह

!! We are Collecting and structuring Indic things as they need to be !!

चालीसा

कविता

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न ही लक्ष्मी कुलक्रमज्जता, न ही भूषणों उल्लेखितोपि वा खड्गेन आक्रम्य भुंजीतः, वीर भोग्या वसुंधरा

ना ही लक्ष्मी निश्चित कुल से क्रमानुसार चलती है और ना ही आभूषणों पर उसके स्वामी का चित्र अंकित होता है । तलवार के दम पर पुरुषार्थ करने वाले ही विजेता होकर इस रत्नों को धारण करने वाली धरती को भोगते है ।

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दीपावली क्या है?

दीपावली का त्योहार हिन्दू, जैन, बौद्ध और‍ सिख धर्म का सम्मलित त्योहार है। संपूर्ण भारत वर्ष में इसे मनाया जाता है। खुशियों को बढ़ाने और जीवन से दुखों के अंधकार को मिटाने का यह त्योहार दुनिया का सबसे अच्छा और सुंदर त्योहार माना जाता है। इस त्योहार को ईसा पूर्व 3300 वर्ष पूर्व से लगातार मनाया जाता रहा है। सिंधु घाटी की सभ्यता के लोग भी इस त्योहार को मनाते थे।
इस दिन जहां भगवान राम श्रीलंका से लौटकर अयोध्या आए थे वहीं बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध जब 17 वर्ष बाद अनुयायियों के साथ अपने गृह नगर कपिल वस्तु लौटे तो उनके स्वागत में लाखों दीप जलाकर दीपावली मनाई थी। साथ ही महात्मा बुद्ध ने ‘अप्पों दीपो भव’ का उपदेश देकर दीपावली को नया आयाम प्रदान किया था।

दूसरी ओर जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर ने दीपावली के दिन ही बिहार के पावापुरी में अपना शरीर त्याग दिया था। कल्पसूत्र में कहा गया है कि महावीर-निर्वाण के साथ जो अन्तर्ज्योति सदा के लिए बुझ गई है, आओ हम उसकी क्षतिपूर्ति के लिए बहिर्ज्योति के प्रतीक दीप जलाएं।

तीसरी ओर सिख धर्म में इस पर्व को प्रकाशपर्व के रूप में इसलिए मनाया जाता है क्योंकि अमृतसर में 1577 में स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था। और, इसके अलावा 1618 में दीवाली के दिन सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को बादशाह जहांगीर की कैद से जेल से रिहा किया गया था।

हिन्दू सहित उक्त तीनों ही धर्मों में दीपावली का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन वे भी घरों की सफाई एवं रंगरोगन कर चारों ओर दीपक जलाकर, रंगोली बनाकर और नए कपड़े पहनकर उत्सव मनाते हैं। इस दिन स्वादिष्ठ पकवान और मिठाईयां बनाई जाती है।

ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में रचित कौटिल्‍य के अर्थशास्त्र के अनुसार आमजन कार्तिक अमावस्या के अवसर पर मंदिरों और घाटों पर बड़े पैमाने पर दीप जलाकर दीपदान महोत्सव मनाते थे। साथ ही मशालें लेकर नाचते थे और पशुओं खासकर भैंसों और सांडो की सवारी निकालते थे। मौर्य राजवंश के सबसे चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने दिग्विजय का अभियान इसी दिन प्रारम्भ किया था। इसी खुशी में दीपदान किया गया था।