Chanakya Niti

Chanakya is regarded as a great thinker and diplomat in India. Many Indian nationalists regard him as one of the earliest people who envisioned a united India spanning the entire subcontinent. Chanakya Niti is a collection of aphorisms, said to be selected by Chanakya from the various shastras.

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Famous Shloka from Chanakya Niti

  - Chapter 5 - 
Shlok 22
60
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One who gives birth, one who brings closer (to the Lord, to spirituality - by means of initiating through the sacred thread ceremony), he who gives knowledge, he who gives food, he who protects from fear - these 5 are deemed as fathers.
जो जन्म देता है, वह जो प्रभु के करीब लाता है (आध्यात्मिकता के लिए - पवित्र उपनयन समारोह के माध्यम से आरंभ करने के माध्यम से), वह जो ज्ञान देता है, वह जो भोजन देता है, वह जो भय से रक्षा करता है - इन 5 को पिता माना जाता है ।
जन्मदाता, पालक, विद्यादाता, अन्नदाता, और भयत्राता - ये पाँचों को पिता समझना चाहिए ।
आचार्य चाणक्य संस्कार की दृष्टि से पांच प्रकार के पिता को गिनाते हुए कहते हैं-जन्म देने वाला, उपनयन संस्कार करने वाला, विद्या देने वाला, अन्नदाता तथा भय से रक्षा करने वाला, ये पांच प्रकार के पिता होते हैं।
22
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रूप और यौवन से सम्पन्न, उच्च कुल में उत्पन्न होकर भी विद्याहीन मनुष्य सुगन्धहीन फूल के समान होते हैं और शोभा नहीं देते।
Though one be endowed with beauty and youth and born in noble families, yet without education they are like the Palasa flower which is void of sweet fragrance.
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जिस सागर को हम इतना गम्भीर समझते हैं, प्रलय आने पर वह भी अपनी मर्यादा भूल जाता है और किनारों को तोड़कर जल-थल एक कर देता है; परन्तु साधु अथवा श्रेठ व्यक्ति संकटों का पहाड़ टूटने पर भी श्रेठ मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं करता।
At the time of the Pralaya (universal destruction) the oceans are to exceed their limits and seek to change, but a saintly man never changes.
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अपने व्यवहार में बहुत सीधे ना रहे, वन में जो सीधे पेड़ पहले काटे जाते हैं, और जो पेड़ टेढ़े हैं वो खड़े हैं ।
Do not be very upright in your dealings, as you would see in forest, the straight trees are cut down while the crooked ones are left standing.
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सभी प्राणी प्रिय वाक्य बोलने से सन्तुष्ट हो जाते हैं। इसीलिए वही बोलना चाहिए। क्योंकि बोलने में कौनसी गरीबी होती है?
All beings are pleased when kind words are offered. Hence speak only thus. Is there a scarcity for good words?
मधुरवचनेन सर्वे प्राणिनः प्रसन्नाः भवन्ति । अत एव मानवः सर्वदा मधुरं वचनम् एव वदेत्, वचने दरिद्रता न करणीया ।
  - Chapter 16 - 
Shlok 06
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राजमहाल कि उंचाई पर बैठने से कौवा गरुड नही हो जाता. उसी तरह एक व्यक्ति के मूल्य, उसकी महानता उसके स्थान या स्थिति द्वारा निर्धारित नहीं होती बल्की उनके गुणों द्वारा निर्धारित होती है.
उत्तमता गुणों से आती है, न कि ऊँचे स्थान से। कौआ महल के शिखर पर बैठकर गरुड नहीं बन जाता।
One achieves greatness because of one’s qualities, not because of a high position. Even is placed at the top of the palace. a crow does not become an eagle