0
0
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on whatsapp

अमर आराधना की बेल, फूल जा, तू फूल जा!
श्याम नभ के नेह के जी का सलौना खेत पाकर
चमकते उन ज्योति-कुसुमों का बगीचा-सा लगाकर
चार चाँद लगा प्रलय में,
एक शशि को भूल जा।
अमर आराधना की बेल, फूल जा, तू फूल जा!

खुले ये छोड़ रक्खे हैं, कि कितना साहसी अम्बर
जगत तो बँट चुका सीमा नगर में द्वार में घर-घर!
बेकलेजे बेसहारा तारकों को झूल जा।
अमर आराधना की बेल, फूल जा, तू फूल जा!

गगन का गान मत गा तू धरा की जीत पर हँस री,
अमर की तू हँसी है तो सजग हो मौत को डँस री,
तू भले ही विश्व के अनुकूल जा,
प्रतिकूल जा।
अमर आराधना की बेल, फूल जा, तू फूल जा!

चमक की हाट नभ है? हो; न तू रख हाट में अपने,
न ये आँसू, न ये कसकें, न ये बलियाँ, न ये सपने,
गगन तो प्रतिबिम्ब है तेरे हृदय-भावों सजा।
अमर आराधना की बेल, फूल जा, तू फूल जा!

जग में गलियाँ, नभ में गलियाँ, बँधा जगत, पथ से चलने को,
सूरज की सौ-सौ किरनों में, विवश, प्रकाशोन्मुख जलने को,
तू अपना प्रकाश पाले, जी की जमना के कूल जा।
अमर आराधना की बेल, फूल जा,
तू फूल जा!

Share the Goodness
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on telegram
Telegram
Share on whatsapp
WhatsApp
Choose from all-time favroits Poets

माखनलाल चतुर्वेदी

भवानीप्रसाद मिश्र

दुष्यंत कुमार

रामधारी सिंह दिनकर

हरिवंशराय बच्चन

महादेवी वर्मा

सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"

सुभद्राकुमारी चौहान

मैथिलीशरण गुप्त

Atal Bihari Vajpayee

जानकीवल्लभ शास्त्री

सुमित्रानंदन पंत

Collectionब्रह्मसंग्रह

!! भारतीय ज्ञान और परंपरा का एक प्रगतिशील संग्रहालय  !!