Menu
Page 4

Kavita

Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on whatsapp

आओ फिर से दिया जलाएँ

आओ फिर से दिया जलाएँ भरी दुपहरी में अँधियारा सूरज परछाई से हारा अंतरतम का नेह निचोड़ें- बुझी हुई बाती सुलगाएँ। आओ फिर से दिया

Read  ➜

आज सिन्धु में ज्वार उठा है

आज सिंधु में ज्वार उठा है, नगपति फिर ललकार उठा है, कुरुक्षेत्र के कण–कण से फिर, पांचजन्य हुँकार उठा है। शत–शत आघातों को सहकर, जीवित

Read  ➜
Brahma Logo Bhagwa