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भारत के आदमी का जीवन ” मैं, मेरी बीबी, मेरा बच्चा ….बस्स !!!”

जैसा बाप, वैसे ही लकीर के फ़कीर बेटे भी !!

— बेटे —

माँ-बाप के दुलारे बेटे !
युगों-युगों से हारे बेटे !!
अहंकार की दौड़ दौड़ते
संसार के भार दबे से
जहां चलाया, वहीँ चल दिए
मुहरे जैसे कोई पिटे से

भीतर अन्धकार भरा पर ,
जग के आज सितारे बेटे
युगों-युगों से हारे बेटे !!

जो भी सिखाया, सीख लिया वह
जहां चलाया, वहीं चले
घर की या दुनिया की पकड़ी
ख़ुद की राह नहीं चले

आँख नहीं है कोई स्वंय की ,
कोई स्वंय की खोज नहीं है
जो मनवाया, राज़ी उससे
अपनी कोई खोज नही है

चाबुक खाते, चले बैल से
खेत जोतते सारे बेटे
युगों -युगों से हारे बेटे !!

मूढों को सब द्रष्टव्य है
साफ़ -साफ़ कर्तव्य है
रोजी-रोटी, दाना-पानी
बीबी-बच्चे , साफ़ कहानी

घिसी-पिटी बातों में जीकर
जीवन रहे संवारे बेटे
युगों -युगों से हारे बेटे !!
दुनिया एक हड्डी का टुकड़ा
जिसको बाप लपकने दौड़ा
और न उसको छू पाया तब
बेटा आन बचाने छोड़ा

हाँफ़-हांफ कर दौड़ रहे हैं
कुत्तों जैसे सारे बेटे
युगों-युगों से हारे बेटे …!!

कोई क्रांति का भाव नहीं है
भीतर कोई आग नहीं
दुखिया-दीन मरें बला से
अपना कोई लगाव नहीं

मेरी बीबी, मेरे बच्चे
बस दुनिया में सबसे अच्छे
तेरे बेटे मरें बला से
मुझको अपने प्यारे बेटे
युगों-युगों से हारे बेटे …!!
दुनिया भी क्या बनिया है ये
देहों को उत्पाद बना
कौड़ियों के दाम ख़रीदे
सारी साँसें , और आत्मा

किन्तु माया की मुद्रा से
असली अपने प्राण गंवाकर
धन, पद से छोटे सौदों में
लाख टके की सांस बिकाकर

रद्दी दुनिया में कचरे से
फिंका गए किनारे बेटे
युगों-युगों से हारे बेटे …!!

सर पर काल कूट खड़ा पर
सर धरती में गाड़े बेटे
युगों-युगों से हारे बेटे …!!

By – DrSalil Samadhia

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