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‘मोदी पक्ष और मोदी विरोध का नेरेटिव’

‘मोदी पक्ष और मोदी विरोध का नेरेटिव’

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इधर बीते चार-पांच सालों में, एक नया ट्रेंड देखने में आया, वह यह कि अब आपसी संबंधों की इमारत भी, मोदी सीमेंट के मसाले पर आधारित हो गई है!
यह ट्रेंड भी मुझे फेसबुक से ही पता चला !
इसे आईटी सेल की करामात कहें या मीडिया द्वारा क्रिएट नेरेटिव, किंतु यह फैक्ट है कि आज पूरा भारत दो खेमो में बट चुका है -मोदी प्रशंसक और मोदी निंदक !

मज़ेदार बात यह है कि आप चाहे मोदी की निंदा करें या प्रशंसा, दोनों ही स्थितियों में मोदी केंद्र में आ जाता है !
अब आप डिबेट हारें या जीतें, मोदी तो जीत ही जाता है क्योंकि उसकी चर्चा हो जाती है !
और चर्चा ही तो किसी भी नेता की खुराक है जिससे वह जिंदा रहता है !
इस तरह तो मोदी की निंदा भी, अंततः मोदी को ही फायदा पहुंचाती है !

सोशल मीडिया का कोई भी माध्यम हो, वह चाहे फेसबुक हो या ट्विटर, अथवा व्हाट्सएप ग्रुप्स, हर जगह दो समूह बन गए हैं -मोदी प्रशंसक समूह और मोदी निंदक समूह !

मोदी प्रशंसक समूह यह मानता है कि पुरानी कांग्रेसी सरकारों ने जो भी काम किया है वह नाकाफी था और जिससे देश का समुचित विकास नहीं हुआ तथा देश की बहुत सारी जमीन दूसरे देशों ने हथिया ली !!
इस समूह की समझ है कि आजादी के बाद देश की सत्ता जिन हाथों में रही, वे लोग अंग्रेज परस्त थे और मुस्लिम परस्त भी थे !
वे परिवारवादी और भ्रष्टाचारी लोग थे, जिन्होंने भारतीय संसाधनों का शोषण करके देश विदेश में भारी संपत्ति बना ली है !
इन्होंने बहुसंख्यक वर्ग की उपेक्षा की, और अल्पसंख्यकों को पाला पोसा ! बहुसंख्यक यानी हिंदू, और अल्पसंख्यक यानी मुस्लिम !!
चूंकि हिंदू बँटा हुआ था और मुस्लिम एकजुट थे लिहाजा इनकी सरकार आसानी से बन जाती थी !
यही नहीं, इन्होंने लगातार मुस्लिम आबादी को बढ़ाने की साज़िशें भी रचीं, ताकि इनका वोट प्रतिशत बढ़ता रहे !

इस समूह की मान्यता है कि पूर्व सरकारों ने देश हित में सही फैसले नहीं लिए ! इनके अनुसार इन पूर्व सरकारों का शरीर कांग्रेसका था, और बुद्धि वामपंथ की !
इस पक्ष के मुताबित, कांग्रेसी सरकारों ने भारत के प्राचीन गौरव, सभ्यता, संस्कृति, इतिहास
आदि हर चीज़ से खिलवाड़ किया !
इन्होंने एक साजिश के तहत हमें गलत इतिहास पढ़ाया और देश के वास्तविक वीरों का कद छोटा करके बताया तथा विदेशी आक्रांताओं को बड़ा करके बताया! यह इसलिए,
जिससे हमारे अवचेतन में हीनता और दासता की ग्रंथियां बनी रहे ताकि, उच्च अभिजात्य और सामंतवादी तरीकों से हमारा शोषण किया जा सके !!

इस समूह के लिए भाजपा और दक्षिणपंथी सरकार तथा उसका नेता नरेंद्र मोदी, एक अवतार है, जो हमारे खोए हुए राष्ट्रीय गौरव की पुनर्स्थापना करेगा, हमारी जमीन के टुकड़े हमें वापस ला देगा, वोटबैंक बनी मुस्लिम आबादी को राष्ट्रीय धारा में जोड़ेगा, और भारत को उसी तरह भव्य और श्रेष्ठ बना देगा जैसा वह अतीत में रहा है!
फिलहाल इस पक्ष का भारत में बहुमत है !

.. दूसरी तरफ मोदी विरोधी लोग हैं !
यह पूर्व कांग्रेसी सरकार के समर्थक व लाभार्थी हैं !
इनके अनुसार देश गलत हाथों में है !
देश की अर्थव्यवस्था चकनाचूर है और देश गृह युद्ध की कगार पर खड़ा है !
इस समूह के हाथ से सत्ता का निवाला गिर गया है और दूसरा निवाला उठाकर मुंह तक लाने की उसकी सामर्थ्य चुक गई है !
यह समूह हताश और कुंठित है !
लिहाजा वह होशो हवास खो बैठा है और जमीन पर लड़ाई लड़ने के बजाय, सोशल मीडिया पर अपनी कुंठा व्यक्त करने को विवश है !!

इसकी स्थिति उस रोगी की तरह हो गई है, जिसके उपचार की कोई संभावना नहीं है, और जो मरना भी नहीं चाहता !
यानि, एक ऐसा अमीर खूसट बुजुर्ग, जो आई.सी.यू. में टंगा होकर भी, डॉक्टर और नर्सों को दुत्कारने और फटकारने से बाज नहीं आता !

इस दूसरे समूह को नरेंद्र मोदी फूटी आंख बर्दाश्त नहीं है ! वह एक कम पढ़े लिखे, गरीबी से उठे, अंग्रेजी ना बोलने वाले, दंभी व्यक्ति के सामने झुकने को तैयार नहीं है !!
उनकी स्थिति तब और भी दुःसह्य हो जाती है, जब यह छोटा आदमी उनके विरुद्ध हुंकार भी भरता है, गर्जना भी करता है, तंज भी कसता है और किसी लोकनायक की तरह देश विदेश में मान्य हो जाता है !!
उसकी भाव भंगिमा और मुख मुद्रा इस दूसरे समूह के लिए ना काबिले बर्दाश्त है !!

यह दूसरा पक्ष बुद्धिजीवी है! और सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय है, क्योंकि इसमें पूर्व पत्रकार, मीडिया और कला संस्थानों के प्रमुख, लेखक और इतिहासकार मौजूद है !!
यह जमीनी लोग नहीं है, लिहाजा यह, अपना युद्ध लेखन के जरिए लड़ रहे हैं !!

ये सोशल मीडिया के महारथी हैं !
इनकी सोशल मीडियागिरी की वजह से ही, इधर एक दूसरा खेमा भी सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गया है !!
अब एक बाण इधर से, तो सौ बाण उधर से चलाए जाते हैं !!

कांग्रेसी इस आस में मोदी विरोध की अपनी उपस्थिति दर्ज कराए रहते हैं कि जब कभी कांग्रेस आएगी तो उन्हें अपनी वफादारी का पारितोषिक मिलेगा !!
वहीं मोदी प्रशंसक पूरी तरह आशान्वित है कि ‘”आएगा तो मोदी ही !””

यह नेरेटिव सोशल मीडिया पर इस कदर हावी है कि दूसरे खेमे के व्यक्ति को देखते ही अनफ्रेंड या ब्लॉक कर दिया जाता है !
क्योंकि दोनों खेमों के स्ट्रांग ओपिनियन है और वह अपने मत से इतर बात सुनते ही आपा खो बैठते हैं !!

फेसबुक पर मुझे भी इस नेरेटिव से दो-चार होना पड़ा !!
जब तक मैं निरापद दिखा, सभी जुड़े रहे !!
किंतु जब कभी राष्ट्रीय मसलों को लेकर मैंने इक्की दुक्की पोस्ट लगाईं, तो उसे मोदी पक्ष में झुका जान कर, बहुत से दूसरे पक्ष के लोग मेरी पोस्टों से नदारद हो गए !

मुझे भी यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि मैंने भी ऐसे कुछ लोगों को अनफ्रेंड किया जो लगातार प्रधानमंत्री के लिए, अपशब्द भरी पोस्ट लगाते थे !!
मेरी समझ यह है कि देश का प्रधानमंत्री आखिरकार राष्ट्र का प्रतिनिधि होता है !
उसे देश की जनता चुनती है, इसलिए एक बार जब वह चुन लिया गया, तो उसके लिए अपशब्दों का प्रयोग जायज नहीं है !!
जोक्स बनाए जा सकते हैं, व्यंग किए जा सकते हैं, किंतु प्रधानमंत्री के लिए गाली गुफ्तारी बर्दाश्त नहीं की जा सकती !
अगर अपशब्द कहना आप की स्वतंत्रता है तो अमित्र करना मेरी स्वतंत्रता भी है !!
वे लोग ऐसा मनमोहन सिंह के लिए कर रहे होते तो भी मेरी यही प्रतिक्रिया होती !

हार को पचाना आना चाहिए !
वह चाहे स्वयं की हो, हमारे मत की हो, विचारधारा की हो, या प्रत्याशी की हो!
.. हार गए तो हार गए, उसमें क्या है!!

हार को पचा न पाना कमजोर आदमी का लक्षण है ! वीर पुरुष प्रतिद्वंदी की श्रेष्ठता को स्वीकार करता है और अगले रण में स्वयं को श्रेष्ठ बनाने की कोशिश करता है !
जीते हुए के लिए क्राय बेबी की तरह गालियां नहीं निकालता है !

फिलहाल तो यह ‘मोदी पक्ष विपक्ष नेरेटिव’ इस तरह छा गया है कि यह मित्रता के संबंध, सामाजिक संबंध और यहां तक की प्रेम संबंधों की मजबूती के लिए भी, कुंडली मिलान की तरह आवश्यक हो गया है !!

गोया, कि आगे के संबंध इस बात से निर्धारित होंगे कि मोदी को लेकर हमारे आप के कितने गुण मिलते हैं !
ठीक-ठाक गुण मिलेंगे तो बात आगे बढ़ेगी, नहीं तो रिश्ता रिजेक्ट हो जाएगा !!

बहरहाल, मैं राजनैतिक मसलों पर कभी नहीं लिखता !
कारण साफ है, मेरे पास 1 वोट है, और मुझे पता है कि वह वोट किसे देना है !!
अब इस एक दिन के लिए, आए दिन का तर्क कुतर्क, मनोरोग ही है, और कुछ नही !

मोदी नेरेटिव, व्यक्तिगत संबंधों का नेरेटिव नहीं बनना चाहिए !

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