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ब्रह्मलेख

#BrahmaLekh

चिंतनशील लेखक, प्रगतिशील लेख

Aham

समझाइश की ज़रूरत बच्चों को नही, अभिभावकों को है !

बच्चे को बुढ़ापे की लाठी ना समझें !
बुढ़ापे की लाठी अगर बनाना है तॊ “बोध” और “जागरण” को बनाएं !
क्योंकि पुत्र वाली लाठी तॊ आपसे पहले भी टूट सकती है !
और आप भी बूढ़े हुए बिना विदा हो सकते हैं !
इसलिए अपने बुढ़ापे की फ़िक्र न करें ,

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