Articlesब्रह्मलेख

• 2 days ago
एकांत और अकेलेपन में बहुत अंतर है । दोनों एक जैसे लगते हैं, पर ऐसा है नहीं । एकांत और अकेलापन दोनों में हम अकेले...

Share now...

• 1 week ago
वर्तमान दुनिया बहुत हल्के लोगों के हाथों में है ! हल्के लोग राष्ट्राध्यक्ष बने हुए हैं, हल्के लोग धर्माधीश.. !! हल्के लोगों के हाथों में...

Share now...

• 3 weeks ago
हमारे एक पड़ोसी हैं, वे दिन में दो-तीन बार बिजली मीटर चेक करते हैं कि कितनी खपत हुई ? कल पहली बार किसी काम से...

Share now...

• 3 weeks ago
स्वयं को Trapped होने से बचाए रखना बड़ी से बड़ी अवेयरनेस है ! ट्रैप्ड (Trapped) यानि – ‘बद्ध’ ! यहां ट्रेप होने का अर्थ है...

Share now...

• 3 weeks ago
महाभारत के वन पर्व के अंतर्गत अध्याय 313 में यक्ष और युधिष्ठिर के बीच हुए संवाद का बड़ा ही रोचक वर्णन है। संवाद के क्रम...

Share now...

• 3 weeks ago
In the preceding sections, we have demonstrated that human possesses an immaterial intellect and a free will. The intellect is not human, nor is the...

Share now...

• 4 weeks ago
व्यक्ति में आराम एवं सुख-चैन भरी जिंदगी की चाह एक स्वाभाविक इच्छा है, लेकिन इसकी अधिकता जीवन पर प्रतिकूल असर डालती है । ऐसे में...

Share now...

• 4 weeks ago
The universe is an instrument to reveal the majesty of God. The inner rmament in the heart of man is also equally a revelation of...

Share now...

• 4 weeks ago
क्या ऐसी आध्यात्मिक क्रांति संभव है, जिसमें बच्चा-बच्चा ’‘अहं ब्रह्मास्मि’ (मैं ब्रह्म हूँ) का जयघोष कर उठे ? जहाँ प्रत्येक मनुष्य ’’‘तत्त्वमसि’ (तुम भी वही...

Share now...

Shlokaब्रह्माश्लोक

 असतो मा सद्गमयतमसो मा ज्योतिर्गमय ।
मृत्योर्मा अमृतं गमय शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

Brihadaranyaka Upanishad
• Chapter 1.3
• Shlok 28
• 2 months ago
ऊँचे पहाड़ पर, पेड़ नहीं लगते, पौधे नहीं उगते, न घास ही जमती है। जमती है सिर्फ बर्फ, जो, कफन की तरह सफेद और, मौत...

Share now...

• 2 months ago
अपने ही मन से कुछ बोलें! क्या खोया, क्या पाया जग में मिलते और बिछुड़ते मग में मुझे किसी से नहीं शिकायत यद्यपि छला गया...

Share now...