Articlesब्रह्मलेख

• 4 weeks ago
Earlier, it was said that in India philosophy itself was regarded as a value and also that value and human life are inextricably blended. What...

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• 1 month ago
 पर्यावरण से हमारा जीवन जुड़ा हुआ है और पर्यावरण में ही पंचतत्व ( पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) समाहित हैं, जिनसे मिलकर हमारा शरीर...

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• 2 months ago
आजकल के लोग पुत्र उत्पन्न नहीं कर रहे हैं, Son ही पैदा कर रहे हैं और ना ही पुत्र उत्पन्न करना चाहते हैं, Son ही...

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• 3 months ago
Krishna is pleased with one who listens to all discourses on religion (Dharma), and reverences all the gods, who is free from jealousy and has...

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• 3 months ago
Faith and knowledge are important in Hinduism. Faith has a four-fold aspect of test of time. In this limited conception of life, man cannot help...

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• 4 months ago
All that is caused, everything that is a result, is short-lived; this is evident from the scriptures (sastras) as well as from experience and reason....

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• 4 months ago
जहां जहां जिस ग्रंथ में सांख्य दर्शन की चर्चा आई है, वहां वहां आप बुद्ध शब्द प्रयोग में पाएंगे। भारतीय ज्ञान परंपरा की जिन्हें रत्ती...

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• 4 months ago
“मैं बैरी , सुग्रीव पियारा अवगुन कवन नाथ मोंहिं मारा “ बाली का वध करने वाले राम बहुत कठोर दिखाई देते हैं ?? मरणासन्न बाली...

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• 5 months ago
।।श्री गणेशाय नमः।। हरिओम तत्सत।। भारत में प्राचीन काल से पशुपालन की वैज्ञानिक पद्धति प्रचलित रही है। प्रत्येक अहिंसक और नित्य के जीवन के लिए...

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Shlokaब्रह्माश्लोक

धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः ⁠।
तस्माद् धर्मं न त्यजामि मा नो धर्मो हतोऽवधीत् ⁠।⁠।⁠

अथातः संप्रत्तिः—यदा प्रैष्यन्मन्यतेऽथ पुत्रमाह, त्वं ब्रह्म, त्वं यज्ञः, त्वं लोक इति; स पुत्रः प्रत्याह, अहं ब्रह्म, अहं यज्ञः, अहं लोक इति;

Brihadaranyaka Upanishad
• Chapter 1.5
• Shlok 17

अथ चैत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि।
ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि।

श्रीमद् भगवद्गीता
• Chapter 2
• Shlok 33

अपहाय निजं कर्म कृष्णकृष्णोति वादिनः ।
ते हरेर्द्वेषिनः पापाः धर्मार्थ जन्म यध्धरेः ॥

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