Grihasth

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Articlesब्रह्मलेख

• 1 week ago
  व्यक्ति के जीवन में परिवार की भूमिका बहुत ही महत्त्वपूर्ण होती है । परिवार में रहकर ही व्यक्ति सेवा, सहकार, सहिष्णुता आदि मानवीय गुणों...

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• 3 weeks ago
इनसान गलती का पुतला है, उससे कभी भी गलती हो सकती है। लेकिन हर गलती के बाद इसका एहसास करना, इससे आवश्यक पाठ सीखना, इसके...

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• 4 weeks ago
एक स्त्री, किसी पुरुष की तरफ क्यों आकर्षित होती है.. अथवा एक पुरुष, किसी स्त्री की ओर क्यों खिंचता है?? सामान्य उत्तर तो यही है...

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• 1 month ago
आजकल के लोग पुत्र उत्पन्न नहीं कर रहे हैं, Son ही पैदा कर रहे हैं और ना ही पुत्र उत्पन्न करना चाहते हैं, Son ही...

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Shlokaब्रह्माश्लोक

अथातः संप्रत्तिः—यदा प्रैष्यन्मन्यतेऽथ पुत्रमाह, त्वं ब्रह्म, त्वं यज्ञः, त्वं लोक इति; स पुत्रः प्रत्याह, अहं ब्रह्म, अहं यज्ञः, अहं लोक इति;

Brihadaranyaka Upanishad
• Chapter 1.5
• Shlok 17
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