Articlesब्रह्मलेख

• 4 months ago
कोई डर नहीं, कोई फिकर नहीं! नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।  शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः।। 3.8 श्रीमद्भवगद्गीता। आपके लिए जो निर्धारित कार्य...

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