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Vigyan

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Articlesब्रह्मलेख

• 2 weeks ago
क्या ऐसी आध्यात्मिक क्रांति संभव है, जिसमें बच्चा-बच्चा ’‘अहं ब्रह्मास्मि’ (मैं ब्रह्म हूँ) का जयघोष कर उठे ? जहाँ प्रत्येक मनुष्य ’’‘तत्त्वमसि’ (तुम भी वही...

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• 3 months ago
मूर्ति और मंदिर। इन दोनों ने ही हिन्दू धर्म का मौजूदा स्वरूप गढ़ा है। इसमें शूद्र वर्ण और वैश्य वर्ण का योगदान सर्वाधिक है। इसके...

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Shlokaब्रह्माश्लोक

तथा च स्मर्यत योजनानां सहस्रम् द्वे द्वे शते द्वे च योजने । एकेन निमिषार्धेन क्रममाण नमोऽस्तु ते ॥

Thaiththareeya Brahmana

सूर्यस्य विवधवर्णाः पवनेन
विघट्टिताः कराः साभ्रे ।
वियति धनुः संस्थानाः
ये दृश्यन्ते तदिन्द्रधनुः ।।

Brihat Samhita
• Chapter 35
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