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अनालोक्य व्ययं कर्ता अनाथः कलहप्रियः ।
आतुरः सर्वक्षेत्रेषु नरः शीघ्रं विनश्यति ॥

anālokya vyayaṃ kartā anāthaḥ kalahapriyaḥ |
āturaḥ sarvakṣetreṣu naraḥ śīghraṃ vinaśyati ||

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The unthinking spender, the homeless urchin the quarrel monger, the man who neglects his wife

बिना सोचे समझे खर्च करने वाला, नटखट बच्चा जिसे अपना घर नहीं, झगड़े पर आमदा आदमी, अपनी पत्नी को दुर्लक्षित करने वाला, जो अपने आचरण पर ध्यान नहीं देता है. ये सब लोग जल्दी ही बर्बाद हो जायेंगे.

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