कर्म ब्रह्मोद्भवं विद्धि ब्रह्माक्षरसमुद्भवम्।
तस्मात्सर्वगतं ब्रह्म नित्यं यज्ञे प्रतिष्ठितम्।।3.15।।

karma brahmodbhavaṁ viddhi brahmākṣhara-samudbhavam
tasmāt sarva-gataṁ brahma nityaṁ yajñe pratiṣhṭhitam

0
0

कर्म की उत्पत्ति ब्रह्माजी से होती है और ब्रह्माजी अक्षर तत्त्व से व्यक्त होते हैं। इसलिये सर्व व्यापी ब्रह्म सदा ही यज्ञ में प्रतिष्ठित है।

The duties for human beings are described in the Vedas, and the Vedas are manifested by God himself. Therefore, the all-pervading Lord is eternally present in acts of yagya.

Share this Shlok
or

Know more about your Dev(i)

Trending Shloka

Shrimad Bhagavad Gita

कर्म ब्रह्मोद्भवं विद्धि ब्रह्माक्षरसमुद्भवम्।
तस्मात्सर्वगतं ब्रह्म नित्यं यज्ञे प्रतिष्ठितम्।।3.15।।

karma brahmodbhavaṁ viddhi brahmākṣhara-samudbhavam
tasmāt sarva-gataṁ brahma nityaṁ yajñe pratiṣhṭhitam

कर्म की उत्पत्ति ब्रह्माजी से होती है और ब्रह्माजी अक्षर तत्त्व से व्यक्त होते हैं। इसलिये सर्व व्यापी ब्रह्म सदा ही यज्ञ में प्रतिष्ठित है।
The duties for human beings are described in the Vedas, and the Vedas are manifested by God himself. Therefore, the all-pervading Lord is eternally present in acts of yagya.

@beLikeBrahma

website - brah.ma

Join Brahma

Learn Sanatan the way it is!