यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः।।3.23।।

yadi hyahaṁ na varteyaṁ jātu karmaṇyatandritaḥ
mama vartmānuvartante manuṣhyāḥ pārtha sarvaśhaḥ

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हे पार्थ अगर मैं किसी समय सावधान होकर कर्तव्य कर्म न करूँ (तो बड़ी हानि हो जाय क्योंकि) मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं। यदि मैं कर्म न करूँ तो ये सब मनुष्य नष्टभ्रष्ट हो जायँ और मैं संकरता को करनेवाला तथा इस समस्त प्रजाको नष्ट करनेवाला बनूँ।

For if I did not carefully perform the prescribed duties, O Parth, all men would follow my path in all respects.

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