अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः।।

Acchedyoyam adaahyoyam akledyo shoshya eva cha ;
Nityah sarvagatah sthaanur achaloyam sanaatanah.

"क्योंकि यह आत्मा अच्छेद्य है,यह आत्मा अदाह्य,अक्लेद्य और निः संदेह अशोष्य है तथा यह आत्मा नित्य,सर्वव्यापी,अचल,स्थिर रहने वाला और सनातन है।।"

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श्रीमद् भगवद्गीता

अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः।।

Acchedyoyam adaahyoyam akledyo shoshya eva cha ;
Nityah sarvagatah sthaanur achaloyam sanaatanah.

"क्योंकि यह आत्मा अच्छेद्य है,यह आत्मा अदाह्य,अक्लेद्य और निः संदेह अशोष्य है तथा यह आत्मा नित्य,सर्वव्यापी,अचल,स्थिर रहने वाला और सनातन है।।"

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