अकीर्तिँँ चापि भूतानि कथायिष्यन्ति तेअव्ययाम्
सम्भावितस्य चाकीर्ततिर्मरनादतिरिच्यते

Akiirtim chaapi bhuutaani kathayishyanti teavyayaam
Sambhaavitasya chaakiirtirmaranaadatirichyate

ଅକୀତ୍ତିଂ ଚାପି ଭୂତାନି କଥୟିଷ୍ୟନ୍ତି ତେଅଵ୍ୟୟାମ୍ ସମ୍ଭାଵିତସ୍ୟ ଚାକୀର୍ତ୍ତିମରଣାଦତିରିଚ୍ୟତେ

ଅପକୀତ୍ତି ମରଣରୁ ଵଳି ଦୁଃଖ ଦାୟକ

और सब लोग तुम्हारी बहुत काल तक रहने वाली अपकीर्ति को भी कहते रहेंगे; और सम्मानित पुरुष के लिए अपकीर्ति मरण से भी अधिक होती है।।

Swami Tejomayananda
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श्रीमद् भगवद्गीता

अकीर्तिँँ चापि भूतानि कथायिष्यन्ति तेअव्ययाम्
सम्भावितस्य चाकीर्ततिर्मरनादतिरिच्यते

Akiirtim chaapi bhuutaani kathayishyanti teavyayaam
Sambhaavitasya chaakiirtirmaranaadatirichyate

ଅକୀତ୍ତିଂ ଚାପି ଭୂତାନି କଥୟିଷ୍ୟନ୍ତି ତେଅଵ୍ୟୟାମ୍ ସମ୍ଭାଵିତସ୍ୟ ଚାକୀର୍ତ୍ତିମରଣାଦତିରିଚ୍ୟତେ

ଅପକୀତ୍ତି ମରଣରୁ ଵଳି ଦୁଃଖ ଦାୟକ

और सब लोग तुम्हारी बहुत काल तक रहने वाली अपकीर्ति को भी कहते रहेंगे; और सम्मानित पुरुष के लिए अपकीर्ति मरण से भी अधिक होती है।।

Swami Tejomayananda

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