अनेकवकत्रनयनमनेकाभ्दुतदर्शनम् ।
अनेकादिव्या भरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम् ।।

Anēkavakatranayanamanēkābhdutadarśanam.
Anēkādivyā bharaṇaṁ divyānēkōdyatāyudham..

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अनेक मुख ओर नेत्रों से युक्त , अनेक अद्भुत दर्शनों वाले बहुत से दिव्य भूषणो से युक्त और बहुत से दिव्य शास्त्रों को धारण किए हुए ओर दिव्य गंध का स्कोर शरीर में लेप किए हुए ।

ସେତେବେଳେ ତାଙ୍କ ଶରୀର ବହୁ ବଦନ ; ବହୁ ନୟନ ଆଶ୍ଚର୍ଯ୍ୟ ଦର୍ଶନ ଯାହା ସବୁ ଥିଲା , ସେହି ଅଳଂକାର ଆଚ୍ଛାଦିତ ଭାବେ ଥିଲା ।।

In that cosmic form , Arjun saw unlimited forces and eyes , decorated with many celestial annaments and wielding many kinds of divine weapons . 

उस अनेक मुख और नेत्रों से युक्त तथा अनेक अद्भुत दर्शनों वाले एवं बहुत से दिव्य भूषणों से युक्त और बहुत से दिव्य शस्त्रों को हाथों में उठाये हुये।।

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