अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम्।
तथापि त्वं महावाहो नैवं शोचितुमर्हसि।।

Atha chainam nityajaatam nityam vaa manyase mrita ;
Tathaapi twam mahaabaaho naivam shochitum arhasi.

"किन्तु यदि तु इस आत्माको सदा जन्मने वाला तथा सदा मरने वाला मानता हो ,तो भी हे महाबाहो!तु इस प्रकार शोक करने योग्य नहीं।।"

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श्रीमद् भगवद्गीता

अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम्।
तथापि त्वं महावाहो नैवं शोचितुमर्हसि।।

Atha chainam nityajaatam nityam vaa manyase mrita ;
Tathaapi twam mahaabaaho naivam shochitum arhasi.

"किन्तु यदि तु इस आत्माको सदा जन्मने वाला तथा सदा मरने वाला मानता हो ,तो भी हे महाबाहो!तु इस प्रकार शोक करने योग्य नहीं।।"

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