अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम् |
विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित्कर्तुमर्हति || 17||

Avināśi tu tadvid'dhi yēna sarvamidaṁ tatam |
vināśamavyayasyāsya na kaścitkartumar'hati || 17||

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नाशरहित तो तू उसको जान, जिससे यह सम्पूर्ण जगत् दृश्यवर्ग व्याप्त है । इस अविनाशी का विनाश करने में कोई भी समर्थ नहीं है ।। १७ ।।

Vyasa

ଯାହା ସମଗ୍ର ଶରୀରକୁ ବ୍ୟାପିଥାଏ, ଏହାକୁ ଅବିସ୍ମରଣୀୟ ବୋଲି ଜାଣ | କେହି ଅକ୍ଷୟ ଆତ୍ମାକୁ ବିନାଶ କରିପାରିବେ ନାହିଁ |

Vyasa

That which pervades the entire body, know it to be indestructible. No one can cause the destruction of the imperishable soul.

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