अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्त मध्यानिभारत।
अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना।।

Avyaktaadeeni bhootani vyaktamadhyaani bhaarathi;
Avyakta nidhanaanyeva tatra kaa paridevana

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"हे अर्जुन!सम्पुर्ण प्राणी जन्म से पहले अप्रकट थे और मरने के बाद भी अप्रकट हो जाने वाले हैं;केवल बीच में ही प्रकट हैं,फिर ऐसी स्थिति में क्या शोक करना है?

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