अव्यक्तोऽयमचिन्तयोऽयमविकार्योऽयमुच्यते।
तस्मादेवं विदित्वेनं नानुशोचितुमर्हसि।।

Avyaktoyam achintyoyam avikaaryoyam uchyate;
Tasmaad evam viditwainam Nannushochitum arhasi.

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यह आत्मा अव्यक्त है,यह आत्मा अचिन्त्य है और यह आत्मा विकाररहित कहा जाता है ।इससे हे अर्जुन !इस आत्मा को उपर्युक्त प्रकारसे जानकर तु शोक करने के योग्य नहीं है अर्थात् तुझे शोक करना उचित नहीं है।

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