11 chapter

. 2 shlok

भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया ।
त्वतः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम्‌ ॥

bhavāpyayau hi bhūtānāṅ śrutau vistaraśō mayā.
tvattaḥ kamalapatrākṣa māhātmyamapi cāvyayam৷৷11.2৷৷

0
0

क्योंकि हे कमलनेत्र! मैंने आपसे भूतों की उत्पत्ति और प्रलय विस्तारपूर्वक सुने हैं तथा आपकी अविनाशी महिमा भी सुनी है॥2॥

हे कमलनयन ! मैंने भूतों की उत्पत्ति और प्रलय आपसे विस्तारपूर्वक सुने हैं तथा आपका अव्यय माहात्म्य (प्रभाव) भी सुना है।।

Share this Shlok
Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on whatsapp
Share on telegram

Trending Shloka

Latest Shloka in our Sangrah