भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया ।
त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यम् अपि चाव्ययम् ।।

bhavaapyayau hi bhootaanaan shrutau vistarasho maya .
Tvattaḥ kamalapatrākṣa māhātmyam api cāvyayam.

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क्योंकि हे कमलनेत्र ! मैंने आपसे भूतों की उत्पत्ति और प्रलय विस्तारपूर्वक सुने हैं तथा आपकी अविनाशी भी महिमा सुनी है ।।

ହେ କମଳଲୋଚନ ! ତୋ ଠାରୁ ପ୍ରାଣୀର ଉତ୍ପତ୍ତି ଓ ପ୍ରଳୟ କଥାଦି ଶ୍ରବଣ କରିଲି , ତୋର ମହାତ୍ମ୍ୟ ଅବ୍ୟକ୍ତ, ଗୋପନୀୟ ତାହା ବି ଜାଣିଲି ।।

I have heard form you in detail about the appearance and disappearance of all living beings, O lotus - eyed one , and also about your eternel majesty .

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