देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत।
तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि।।

Dehee nityam avadhyoyam dehe Sarvasya bhaarata ;
Tasmaat Sarvaani bhootani na twam Shochitum arhasi.

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"हे अर्जुन! यह आत्मा सबके शरीर में सदा ही अवध्य (जिसका वध नहीं किया जा सके)है। इस कारण सम्पुर्ण प्रणियों के लिए तु शोक करने योग्य नहीं है।"

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