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देवद्रव्यं गुरुद्रव्यं परदाराभिमर्शनम् ।
निर्वाहः सर्वभूतेषु विप्रश्चाण्डाल उच्यते ॥

devadravyaṃ gurudravyaṃ paradārābhimarśanam |
nirvāhaḥ sarvabhūteṣu vipraścāṇḍāla ucyate ||

The brahmana who steals the property of the Deities and the spiritual preceptor, who cohabits with another’s wife, and who maintains himself by eating anything and everything s called a chandala.

वह ब्राह्मण जो भगवान् के मूर्ति की सम्पदा चुराता है और वह अध्यात्मिक गुरु जो दुसरे की पत्नी के साथ समागम करता है और जो अपना गुजारा करने के लिए कुछ भी और सब कुछ खाता है वह चांडाल है.

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Chankya Niti

देवद्रव्यं गुरुद्रव्यं परदाराभिमर्शनम् ।
निर्वाहः सर्वभूतेषु विप्रश्चाण्डाल उच्यते ॥

devadravyaṃ gurudravyaṃ paradārābhimarśanam |
nirvāhaḥ sarvabhūteṣu vipraścāṇḍāla ucyate ||

The brahmana who steals the property of the Deities and the spiritual preceptor, who cohabits with another’s wife, and who maintains himself by eating anything and everything s called a chandala.
वह ब्राह्मण जो भगवान् के मूर्ति की सम्पदा चुराता है और वह अध्यात्मिक गुरु जो दुसरे की पत्नी के साथ समागम करता है और जो अपना गुजारा करने के लिए कुछ भी और सब कुछ खाता है वह चांडाल है.

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