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धनहीनो न हीनश्च धनिकः स सुनिश्चयः ।
विद्यारत्नेन हीनो यः स हीनः सर्ववस्तुषु ॥

dhanahīno na hīnaśca dhanikaḥ sa suniścayaḥ |
vidyāratnena hīno yaḥ sa hīnaḥ sarvavastuṣu ||

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One destitute of wealth is not destitute, he is indeed rich (if he is learned); but the man devoid of learning is destitute in every way.

जिसके पास धन नहीं है वो गरीब नहीं है, वह तो असल में रहीस है, यदि उसके पास विद्या है. लेकिन जिसके पास विद्या नहीं है वह तो सब प्रकार से निर्धन है.

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