दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् ।
सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम् ।।

Divyamālyāmbaradharaṁ divyagandhānulēpanam.
Sarvāścaryamayaṁ dēvamanantaṁ viśvatōmukham..

सब प्रकार के आश्चर्य से युक्त , सीमारहित और सब ओर मुख किए हुए विरटस्वरूप परमदेव परमेश्वर को अर्जुन ने देखा ।।

ବହୁ ଶସ୍ତ୍ର ଧାରଣ ପୂର୍ବକ ଦିବ୍ୟମାଳା ଦିବ୍ୟ ବସ୍ତ୍ର ପରିଧାନିତ ସର୍ବାଙ୍ଗ ଦିବ୍ୟଗଧ ଯୁକ୍ତ ସକଳ ଦିଗରେ ମୁଖଥିବା ଆଶ୍ଚର୍ଯ୍ୟ ଯୁକ୍ତ ଅସୀମ ବିରାଟ ସ୍ବରୂପ ପରମଦେବ ଙ୍କୁ ଅର୍ଜୁନ ଦର୍ଶନ କଲେ ।।

He wore many garlands on his body and was anointed with many sweet - smiling heavenly fragrances . He revealed himself as the wonderful and infinite Lord whose face is everywhere .

दिव्य माला और वस्त्रों को धारण किये हुये और दिव्य गन्ध का लेपन किये हुये एवं समस्त प्रकार के आश्चर्यों से युक्त अनन्त, विश्वतोमुख (विराट् स्वरूप) परम देव (को अर्जुन ने देखा)।।

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Shrimad Bhagavad Gita

दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् ।
सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम् ।।

Divyamālyāmbaradharaṁ divyagandhānulēpanam.
Sarvāścaryamayaṁ dēvamanantaṁ viśvatōmukham..

सब प्रकार के आश्चर्य से युक्त , सीमारहित और सब ओर मुख किए हुए विरटस्वरूप परमदेव परमेश्वर को अर्जुन ने देखा ।।
ବହୁ ଶସ୍ତ୍ର ଧାରଣ ପୂର୍ବକ ଦିବ୍ୟମାଳା ଦିବ୍ୟ ବସ୍ତ୍ର ପରିଧାନିତ ସର୍ବାଙ୍ଗ ଦିବ୍ୟଗଧ ଯୁକ୍ତ ସକଳ ଦିଗରେ ମୁଖଥିବା ଆଶ୍ଚର୍ଯ୍ୟ ଯୁକ୍ତ ଅସୀମ ବିରାଟ ସ୍ବରୂପ ପରମଦେବ ଙ୍କୁ ଅର୍ଜୁନ ଦର୍ଶନ କଲେ ।।
He wore many garlands on his body and was anointed with many sweet - smiling heavenly fragrances . He revealed himself as the wonderful and infinite Lord whose face is everywhere .
दिव्य माला और वस्त्रों को धारण किये हुये और दिव्य गन्ध का लेपन किये हुये एवं समस्त प्रकार के आश्चर्यों से युक्त अनन्त, विश्वतोमुख (विराट् स्वरूप) परम देव (को अर्जुन ने देखा)।।

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