7

. 15

यस्यार्थास्तस्य मित्राणि यस्यार्थास्तस्य बान्धवाः ।
यस्यार्थाः स पुमाँल्लोके यस्यार्थाः स च पण्डितः ॥

yasyārthāstasya mitrāṇi yasyārthāstasya bāndhavāḥ |
yasyārthāḥ sa pumāṁlloke yasyārthāḥ sa ca paṇḍitaḥ ||

He who has wealth has friends and relations; he alone survives and is respected as a man

वह व्यक्ति जिसके पास धन है उसके पास मित्र और सम्बन्धी भी बहोत रहते है. वही इस दुनिया में टिक पाता है और उसीको इज्जत मिलती है.

Share this Shlok
Share on facebook
Share on twitter
Share on linkedin
Share on whatsapp
Share on telegram

Trending Shloka

Latest Shloka in our Sangrah

A futuristic Library of Bhartiye Wisdom.

Brahma is building the biggest open-source collection of eternal Bhartiye Gyan in all forms. If you are enlightened do join our team of change-makers.

Chankya Niti

यस्यार्थास्तस्य मित्राणि यस्यार्थास्तस्य बान्धवाः ।
यस्यार्थाः स पुमाँल्लोके यस्यार्थाः स च पण्डितः ॥

yasyārthāstasya mitrāṇi yasyārthāstasya bāndhavāḥ |
yasyārthāḥ sa pumāṁlloke yasyārthāḥ sa ca paṇḍitaḥ ||

He who has wealth has friends and relations; he alone survives and is respected as a man
वह व्यक्ति जिसके पास धन है उसके पास मित्र और सम्बन्धी भी बहोत रहते है. वही इस दुनिया में टिक पाता है और उसीको इज्जत मिलती है.

@beLikeBrahma