इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ ।
एतद्‍बुद्ध्वा बुद्धिमान्स्यात्कृतकृत्यश्च भारत

iti guhyatamaṅ śāstramidamuktaṅ mayā.nagha.
ētadbuddhvā buddhimānsyātkṛtakṛtyaśca bhārata

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हे निष्पाप अर्जुन! इस प्रकार यह शास्त्रों का अति गोपनीय रहस्य मेरे द्वारा कहा गया है, हे भरतवंशी जो मनुष्य इस परम-ज्ञान को इसी प्रकार से समझता है वह बुद्धिमान हो जाता है और उसके सभी प्रयत्न पूर्ण हो जाते हैं

ହେ ନିଷ୍ପାପ ଅର୍ଜୁନ ! ଏହି ପ୍ରକାର ଅତି ଗୋପନୀୟ ଶାସ୍ତ୍ରକୁ ମୋ ଦ୍ୱାରା କୁହାଗଲା।ଏହାକୁ ଜାଣିଲେ ଲୋକ ବୁଦ୍ଧିମାନ ଓ କୃତାର୍ଥ ହେବେ।

I have shared this most secret principle of the Vedic scriptures with you, O sinless Arjun. By understanding this, a person becomes enlightened, and fulfills all that is to be accomplished.

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