न च मतसथानि भूतानि पशय मे योगमैशवर।
भूतभूत्र च भूतसथो ममात्मा भूतभावन:‌।।

N c mtsthni bhutani psy me yogmaisbr
Bhutbhunn c bhutstho mmatma bhutbhabn h

ତଥାପି ସମସ୍ତ ସୃଷ୍ଟି ପଦାର୍ଥ ମୋ' ଠାରେ ନାହିଁ ମୋର ଯୋଗୈଶ୍ବର୍ଯ୍ୟ ଦେଖ।ଯଦିଓ ମୁଁ ସମସ୍ତ ଜୀବର ଧାରଣ ଓ ପୋଷଣ କର୍ତ୍ତା ଅଟେ ଏବଂ ଯଦିଓ ମୁଁ ସର୍ବତ୍ର ବିଦ୍ୟାମାନ , ତଥାପି ମୋର ଆତ୍ମା ସମସ୍ତ ସୃଷ୍ଟି ର ମୂଳ ଅଟେ।

यह सब संसार मेरे निराकार स्वरूपसे व्याप्त है। सम्पूर्ण प्राणी मुझ में स्थित हैं; परन्तु मैं उनमें स्थित नहीं हूँ तथा वे प्राणी भी मेरेमें स्थित नहीं हैं -- मेरे इस ईश्वर-सम्बन्धी योग-(सामर्थ्य-) को देख ! सम्पूर्ण प्राणियोंको उत्पन्न करनेवाला और उनका धारण, भरण-पोषण करनेवाला मेरा स्वरूप उन प्राणियोंमें स्थित नहीं है।

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Shrimad Bhagavad Gita

न च मतसथानि भूतानि पशय मे योगमैशवर।
भूतभूत्र च भूतसथो ममात्मा भूतभावन:‌।।

N c mtsthni bhutani psy me yogmaisbr
Bhutbhunn c bhutstho mmatma bhutbhabn h

ତଥାପି ସମସ୍ତ ସୃଷ୍ଟି ପଦାର୍ଥ ମୋ' ଠାରେ ନାହିଁ ମୋର ଯୋଗୈଶ୍ବର୍ଯ୍ୟ ଦେଖ।ଯଦିଓ ମୁଁ ସମସ୍ତ ଜୀବର ଧାରଣ ଓ ପୋଷଣ କର୍ତ୍ତା ଅଟେ ଏବଂ ଯଦିଓ ମୁଁ ସର୍ବତ୍ର ବିଦ୍ୟାମାନ , ତଥାପି ମୋର ଆତ୍ମା ସମସ୍ତ ସୃଷ୍ଟି ର ମୂଳ ଅଟେ।
यह सब संसार मेरे निराकार स्वरूपसे व्याप्त है। सम्पूर्ण प्राणी मुझ में स्थित हैं; परन्तु मैं उनमें स्थित नहीं हूँ तथा वे प्राणी भी मेरेमें स्थित नहीं हैं -- मेरे इस ईश्वर-सम्बन्धी योग-(सामर्थ्य-) को देख ! सम्पूर्ण प्राणियोंको उत्पन्न करनेवाला और उनका धारण, भरण-पोषण करनेवाला मेरा स्वरूप उन प्राणियोंमें स्थित नहीं है।

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