न तु मां शक्यसे द्रष्टुम् नेनैव स्वचक्षुषा ।
दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम् ।।

Na tu māṁ śakyasē draṣṭum nēnaiva svacakṣuṣā.
Divyaṁ dadāmi tē cakṣuḥ paśya mē yōgamaiśvaram..

परन्तु मुझको तू इन अपने प्राकृत नेत्रो द्वारा देखने में नि: संदेह समर्थ नहीं हैं , इसी से मैं तुझे दिव्य अर्थात अलौकिक चक्षु देता हूं , इससे तु मेरी ईश्वरीय योग शक्ति को देख ।।

ମୁଁ ଜାଣେ ତୁମେ ମୋର ଏହି ରୂପକୁ ତୁମର ପ୍ରାକୃତିକ ରୂପ ଦ୍ଵାରା ଦେଖିବାରେ ସମର୍ଥ ହେବ ନାହିଁ । ତେଣୁ ତୁମକୁ ଦିବ୍ୟ ଚକ୍ଷୁ ଦେଉଛି । ତାହା ଦ୍ୱାରା ମୋର ଏହି ରୂପକୁ ଦେଖିପାରିବ ।।

But you cannot seemy cosmic form with these physical eyes of yours . Therefore , I grant you divine vision . Behold my mazestic opulence .

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Shrimad Bhagavad Gita

न तु मां शक्यसे द्रष्टुम् नेनैव स्वचक्षुषा ।
दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम् ।।

Na tu māṁ śakyasē draṣṭum nēnaiva svacakṣuṣā.
Divyaṁ dadāmi tē cakṣuḥ paśya mē yōgamaiśvaram..

परन्तु मुझको तू इन अपने प्राकृत नेत्रो द्वारा देखने में नि: संदेह समर्थ नहीं हैं , इसी से मैं तुझे दिव्य अर्थात अलौकिक चक्षु देता हूं , इससे तु मेरी ईश्वरीय योग शक्ति को देख ।।
ମୁଁ ଜାଣେ ତୁମେ ମୋର ଏହି ରୂପକୁ ତୁମର ପ୍ରାକୃତିକ ରୂପ ଦ୍ଵାରା ଦେଖିବାରେ ସମର୍ଥ ହେବ ନାହିଁ । ତେଣୁ ତୁମକୁ ଦିବ୍ୟ ଚକ୍ଷୁ ଦେଉଛି । ତାହା ଦ୍ୱାରା ମୋର ଏହି ରୂପକୁ ଦେଖିପାରିବ ।।
But you cannot seemy cosmic form with these physical eyes of yours . Therefore , I grant you divine vision . Behold my mazestic opulence .

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