न तु मां शक्यसे द्रष्टुम् नेनैव स्वचक्षुषा ।
दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम् ।।

Na tu māṁ śakyasē draṣṭum nēnaiva svacakṣuṣā.
Divyaṁ dadāmi tē cakṣuḥ paśya mē yōgamaiśvaram..

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परन्तु मुझको तू इन अपने प्राकृत नेत्रो द्वारा देखने में नि: संदेह समर्थ नहीं हैं , इसी से मैं तुझे दिव्य अर्थात अलौकिक चक्षु देता हूं , इससे तु मेरी ईश्वरीय योग शक्ति को देख ।।

ମୁଁ ଜାଣେ ତୁମେ ମୋର ଏହି ରୂପକୁ ତୁମର ପ୍ରାକୃତିକ ରୂପ ଦ୍ଵାରା ଦେଖିବାରେ ସମର୍ଥ ହେବ ନାହିଁ । ତେଣୁ ତୁମକୁ ଦିବ୍ୟ ଚକ୍ଷୁ ଦେଉଛି । ତାହା ଦ୍ୱାରା ମୋର ଏହି ରୂପକୁ ଦେଖିପାରିବ ।।

But you cannot seemy cosmic form with these physical eyes of yours . Therefore , I grant you divine vision . Behold my mazestic opulence .

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