नाधनाः प्राप्नुवन्त्यर्थान्नरा यत्नशतैरपि ।
अर्थैरर्थाः प्रबध्यन्ते गजाः प्रतिगजैरिव ॥

nādhanāḥ prāpnuvantyarthānnarā yatnaśatairapi |
arthairarthāḥ prabadhyante gajāḥ pratigajairiva ||

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निर्धन जन सौ प्रयत्न कर लें तो भी धन नहीं कमा सकते हैं । जैसे हाथियों के माध्यम से हाथी वश में किए जाते हैं वैसे ही धन के निवेश से ही धन अभिवृद्धि किया जा सकता हैं।।

Vichaar Sankalan
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